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कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। पुल्लिंग: मैं दूध ______ (पी)

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Question

कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

मैं दूध ______ (पी) 

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Solution

मैं दूध पीता हूं।

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बातचीत
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संजाल पूर्ण कीजिए :


आकृति पूर्ण कीजिए :


एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी का वास्‍तविक नाम - ______ 


एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी की माता जी इन भाषाओं की विदुषी थीं - ______ 


एक-दो शब्‍दों में उत्‍तर लिखिए :

शिवानी की प्रिय रचना - ______ 


कारण लिखिए :

शिवानी जी को पाठकों से प्रशंसा प्राप्त हुई है ______ 


कारण लिखिए :

शिवानी जी लेखिका बन गईं ______ 


पाठ (बातचीत) में प्रयुक्‍त शिवानी की रचनाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।


‘परिवेश का प्रभाव व्यक्‍तित्‍व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

तुम केला ______ (खा) 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो स्त्रीलिंग:

मैं गाना ______ (सीख)


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। स्त्रीलिंग:

हम हिंदी ______ (पढ़)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

माताजी जी रोज़ दूध पीती हैं। (चाय)


मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।


तुम्हारा विद्यालय कहाँ है?


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

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