मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता १० वी

पाठ (बातचीत) में प्रयुक्‍त शिवानी की रचनाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।

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प्रश्न

पाठ (बातचीत) में प्रयुक्‍त शिवानी की रचनाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

शिवानी की रचनाओं की सूची : 

  • मैं मुर्गा हूँ
  • मरीचिका
  • कृष्णकली
  • चरैवति
  • सुरंगमा
  • रति विलाप
  • मेरा बेटा
  • तीसरा बेटा
  • कालिंदी 
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बातचीत
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पाठ 2.08: बातचीत - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ९८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 10 Maharashtra State Board
पाठ 2.08 बातचीत
स्‍वाध्याय | Q (७) | पृष्ठ ९८

संबंधित प्रश्‍न

पढ़ो और समझो

  पुल्लिंग  स्त्रीलिंग
मैं पढ़ता हूँ।
गाता हूँ।
 पढ़ती हूँ।
गाती हूँ।
तुम    खेलते हो।
खाते हो।
खेलती हो।
खाती हो।
हम    सीखते हैं। सीखती हो।
आप  सुनते हैं। सुनती हो।

कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

तुम केला ______ (खा) 


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

माताजी जी रोज़ दूध पीती हैं। (चाय)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

वे बच्चे शाम को खेलते हैं। (पढ़ना)


हम सुबह ______ स्नान करते हैं।


मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।


अंत्याक्षरी खेलना क्यों चाहता है? 


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

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