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प्रश्न
कल्पनाप्रधान निबंध: यदि श्यामपट बोलने लगा......
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उत्तर
यदि श्यामपट बोलने लगा ......
कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि यदि श्यामपट बोलने लगे तो वह क्या कहेगा। अगर श्यामपट बोलने लगे, तो सबसे पहले मैं उससे दोस्ती का हाथ बढ़ाऊँगा। हाँ, मैं निश्चित रूप से उसे अपना मित्र बनाऊँगा, क्योंकि मैं एक विद्यार्थी हूँ। मैं अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल उसके साथ बिता रहा हूँ, और बदले में उससे पूरा समर्पण पा रहा हूँ।
अगर श्यामपट बोलने लगे, तो मैं उससे उसकी पूरी कहानी सुनना चाहूँगा। किस विद्यालय में उसका जन्म हुआ? किन-किन लोगों ने उस पर ज्ञान का आदान-प्रदान किया? किसने उसकी देखभाल की? श्यामपट होने पर उसे कैसा महसूस होता है? ऐसे कई सवाल मैं उससे पूछना चाहूँगा। मैं उससे पूछूँगा कि उस पर पहली बार क्या लिखा गया और किसने लिखा था? उस समय उसकी उम्र क्या थी, और अब वह उम्र के किस पड़ाव पर है? क्या वह छात्रों और शिक्षकों को पढ़ाई में मदद करके आनंदित होता है, या चॉक से लगने वाली निरंतर चोटों से दुखी होता है?
वास्तव में, यदि श्यामपट बोलने लगे, तो शिक्षकों और छात्रों के लिए पढ़ना-पढ़ाना और आसान हो जाएगा। शिक्षक श्यामपट पर लिखने के बजाय, उसे अपनी बात बताएगा, और श्यामपट तुरंत उसके प्रश्नों और विचारों को खुद पर अंकित कर लेगा। एक छात्र के रूप में, जब भी मैं किसी प्रश्न को हल करने में उलझ जाऊँगा, तो श्यामपट से उसका समाधान दिखाने के लिए कहूँगा।
मैं हर दिन श्यामपट की स्थिति के बारे में जानूंगा और उसके सुख-दुख में भागीदार बनूंगा। अगर किसी दिन शिक्षक कक्षा में अनुपस्थित हों, तो मैं श्यामपट से पढ़ाने के लिए कहूंगा। श्यामपट की निगाहें एक शिक्षक की तरह कक्षा के सभी छात्रों पर होती हैं, इसलिए मैं उसे कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए कहूंगा। जो भी छात्र कक्षा में अनुचित व्यवहार करेगा, मैं श्यामपट से तुरंत उसका नाम बताने के लिए कहूंगा।
श्यामपट की मदद से पढ़-लिखकर ही मैं यहां तक पहुंचा हूँ। मैं उससे पूछना चाहूंगा कि उसकी सहायता से कितने लोग डॉक्टर, शिक्षक, इंजीनियर बने हैं और कितनों ने अपने जीवन में सफलता हासिल की है। श्यामपट शिक्षा जगत का एक अभिन्न और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। उसी की सहायता से पूरा विश्व शिक्षित और प्रशिक्षित हो रहा है, और मैं भी उससे लाभान्वित हो रहा हूँ। इसलिए, मैं तहे दिल से उसका धन्यवाद करूंगा।
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