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प्रश्न
‘स्वार्थ के अंधेपन से व्यक्ति अपनों से दूर हो जाता है’ इस संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
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उत्तर
स्वार्थ इंसान को मतलबी बना देता है। स्वार्थांध व्यक्ति को केवल अपना स्वार्थ दिखाई देता है। स्वार्थ लोभ को बढ़ाता है। स्वार्थी मनुष्य सिर्फ अपने बारे में ही सोचता है, किस तरह से खुद का फायदा होगा, इसी सोच में वह डूबा रहता है। वह दूसरों के बारे में बिल्कुल भी नही सोचता। मनुष्य ने अपनी स्वार्थपरता के कारण इस धरती को भी कहीं का नहीं छोड़ा। पृथ्वी जो कि हमारे जीवन का आधार है उसे भी अपने स्वार्थ के लिए नुकसान पहूँचा रहा है।
मनुष्य इच्छाओं का पुतला है उसका व्यावहारिक जीवन आकांक्षाओं से भरा पड़ा है। अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह दूसरों के लिए अपने आप को कष्ट नहीं देना चाहता। स्वार्थ इंसान को भ्रष्ट बना देता है।वह इंसान के हृदय को गलत विचारों से भर देता है।स्वार्थी इंसान अपने सिद्धांतों को भूल जाता है।
पुरातन कथा जैसे, रामायण में कैकयी तथा महाभारत में दुर्योधन स्वार्थांध थे। स्वार्थ के कारण ही रामायण और महाभारत के युद्ध हुए। विश्व के अनेक नेता आज भी स्वार्थ के कारण कहीं न कहीं युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं | यदि लोग अपने-अपने स्वार्थों पर नियंत्रण रखें, तो युद्ध भी टल जाएँगे। एक बार निश्स्वार्थ भावना का सुख अनुभव कर लेने पर फिर कोई भी व्यक्ति स्वार्थ को पास नहीं ठहरने देगा। इसलिए यह सही है कि स्वार्थ के कारण लोग अपनों से दूर हो जाते हैं।
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