Advertisements
Advertisements
प्रश्न
मातृभूमि की महत्ता को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
Advertisements
उत्तर
मातृभूमि अर्थात वह स्थान, जहाँ हमारा जन्म होता है। जिसके अन्न-जल को ग्रहण कर हमारा शरीर पुष्ट होता है, जिसकी गोदी में, पवित्र वायु में साँस लेकर हम जीते हैं। वह हमारी माता के समान होती है। मनुष्य के जीवन में मातृभूमि का बड़ा महत्त्व है। हमारी मातृभूमि हमारे हृदय में स्वाभिमान का भाव जगाती है। दूसरे देशों में हमें कितनी भी सुख-सुविधाएँ क्यों न मिल जाएँ, वे हमारी मातृभूमि कभी नहीं बन सकते। विदेशों में जब हम अपने राष्ट्रध्वज को देखते हैं या राष्ट्रगान सुनते हैं तो एक अलग ही प्रकार की अनुभूति होती है। अपने देश के प्रति जुड़ाव की भावना मन में आ जाती है। अपनी प्यारी मातृभूमि पर हमें सदा सर्वस्व न्योछावर कर देने के लिए तैयार रहना चाहिए। जिस प्रकार मनुष्य प्रेम और त्याग के साथ अपने परिवार का पोषण करता है, उसी प्रकार प्रेम और त्याग के साथ उसे अपने देश की रक्षा करनी चाहिए।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्न पंक्तियों में से प्रतीकात्मक पंक्ति छाँटकर उसके स्पष्ट कीजिए –
(1) चलते-चलते जो कभी गिर जाओ।
(2) रात की कोख ही से सुबह जन्म लेती है।
(3) अपनी आँखों में जब भी देखा है।
‘पालनाघर की आवश्यकता’ पर अपने विचार लिखिए।
नौकरीपेशा अभिभावकों के बच्चों के पालन की समस्या पर प्रकाश डालिए।
संकल्पना स्पष्ट कीजिए -
विषम श्रृंखलाएँ
‘देश की रक्षा-मेरा कर्तव्य’, इसपर अपना मत स्पष्ट कीजिए ।
‘देश के विकास में युवकों का योगदान’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।
स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ समझते हुए प्रस्तुत गीत का रसास्वादन कीजिए।
सहसंबंध जोड़कर अर्थपूर्ण वाक्य बनाइए –
(१) पाती प्रेम की
(२) साईं
‘संत दादू के मतानुसार ईश्वर सबमें है’, इस आशय को व्यक्त करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर उनका भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
‘प्रेम और स्नेह मनुष्य जीवन का आधार है’, इस संदर्भ में अपना मत लिखिए।
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए -
उसेतो मछुवे पर दया करना चाहिए था।
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए -
उसे तुम्हारे शक्ती पर विश्वास हो गया।
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए -
वह निर्भीक व्यक्ती देश में सुधार करता घूमता था।
यशोदा अपने पुत्र को शांत करते हुए कहती है −
.........................................................
.........................................................
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए −
‘‘जलपुट आनि धरनि पर राख्यौ।
गहि आन्यौ वह चंद दिखावै।।’’
‘माँ ममता का सागर होती है’, इस उक्ति में निहित विचार अपने शब्दों में लिखिए।
जानकारी दीजिए :
संत सूरदास के प्रमुख ग्रंथ - ____________ ____________
सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
घटनाक्रम के अनुसार लिखिए -
- मीठे पानी का सोता है।
- ममता के बादल कीं मँड़राती कोमलता-भीतर पिराती है।
- सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है।
- जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है।
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है, जितना भी उँडेलताहूँ, भर-भर फिर आता है,' इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।
अपनी जिंदगी को सहर्ष स्वीकारना चाहिए' इस कथन परअपने विचार लिखिए।
जानकारी दीजिए :
मुक्तिबोध जी का साहित्य।
अलंकार पहचानकर लिखिए :
कूलन में केलिन में, कछारन में, कुंजों में
क्यारियों में, कलि-कलीन में बगरो बसंत है।
‘स्वागत है’ कविता में ‘डर’ का भाव व्यक्त करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर अर्थ लिखिए।
गिरमिटियों की भावना तथा कवि की संवेदना को समझते हुए कविता का रसास्वादन कीजिए।
'कागज की पोशाक शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट कीजिए।
जीवन की सर्वोत्तम पूँजी मित्रता है,' इस पर अपना मंतव्य
लिखिए।
