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‘देश की रक्षा-मेरा कर्तव्य’, इसपर अपना मत स्पष्ट कीजिए ।

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प्रश्न

‘देश की रक्षा-मेरा कर्तव्य’, इसपर अपना मत स्पष्ट कीजिए ।

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उत्तर

‘देश की रक्षा-मेरा कर्तव्य’

जिस देश में हमारा जन्म होता है, जिस देश का अन्न जल खा-पीकर हम बड़े होते हैं, उस देश से प्यार करना और उसकी स्वतंत्रता रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। इसी भावना के कारण हमारे देश थी। के अनेक वीरों और क्रांतिकारियों ने अपने देश के हित और उसकी बावजूद रक्षा के लिए अपने प्राण निछावर कर दिए। समय जो देश हमें सम्मान के साथ जीने और सुख-सुविधा के साथ कवि रहने का अधिकार देता है, उसकी हर तरह से हमें रक्षा करनी चाहिए। हमारे देश में तरह-तरह की समस्याएं हैं। समाज-विरोधी तत्त्व देश में अव्यवस्था फैलाने का काम कर रहे हैं। धर्म के नाम पर जगह-जगह 'दंगा-फसाद' होते हैं। आतंकवाद से सारा देश त्रस्त है। मोर्चा-आंदोलनों में राष्ट्र की संपत्ति बरबाद की जाती है।
भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। इन सबके प्रति हमारा भी कुछ कर्तव्य हैं। जहाँ तक हो सके हमें अपने स्तर पर इन बुराइयों से निपटाने की कोशिश करनी चाहिए। लोगों में देश-प्रेम की भावना जगानी चाहिए और लोगों से देशहित के कार्यों में सहयोग देने की अपिल करनी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, स्वच्छता अभियान आदि में सहयोग देने तथा वृक्षारोपण अभियान के द्वारा पर्यावरण की सुरक्षा का काम करने आदि से भी देश की रक्षा होती है। इन कार्यों में सहयोग देना हर देशवासी का कर्तव्य है।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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अध्याय 3: पंद्रह अगस्त - अभिव्यक्ति [पृष्ठ ११]

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बालभारती Hindi Yuvakbharati Standard 11 Maharashtra State Board
अध्याय 3 पंद्रह अगस्त
अभिव्यक्ति | Q 1 | पृष्ठ ११
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