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‘संत दादू के मतानुसार ईश्वर सबमें है’, इस आशय को व्यक्त करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर उनका भावार्थ स्पष्ट कीजिए। - Hindi

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प्रश्न

‘संत दादू के मतानुसार ईश्वर सबमें है’, इस आशय को व्यक्त करने वाली पंक्तियाँ ढूँढ़कर उनका भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

संत दादू दयाल ने 'काहै कौं दुख दीजिये, साईं है सब माहिं। दादू एकै आत्मा, दूजा कोई नाहिं' पंक्तियों में, ईश्वर को घट-घट में व्याप्त बताया है। वे कहते हैं कि हर व्यक्ति में ईश्वर का अंश होता है। सब की आत्मा एक ही है। उसमें ईश्वर विद्यमान होते हैं। उसमें परमात्मा के अतिरिक्त दूसरा कोई नहीं होता। इसलिए कोई व्यक्ति यदि किसी व्यक्ति को कष्ट देता है, उसे पीड़ित करता है, तो वह उस व्यक्ति का नहीं, बल्कि अपने स्वामी प्रभु का ही अपमान करता है। इसलिए हमें किसी भी व्यक्ति को कभी दुख नहीं देना चाहिए।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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अध्याय 5.1: मध्ययुगीन काव्य - भक्ति महिमा - स्वाध्याय [पृष्ठ २१]

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बालभारती Hindi Yuvakbharati [English] Standard 11 Maharashtra State Board
अध्याय 5.1 मध्ययुगीन काव्य - भक्ति महिमा
स्वाध्याय | Q २. (आ) | पृष्ठ २१

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