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'अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है’, इस उक्ति पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

'अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है’, इस उक्ति पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

मनुष्य के अंदर सद् और असद् दो वृत्तियाँ होती हैं। सद् का अर्थ है अच्छा और असद् का अर्थ है जो अच्छा न हो यानी बुरा। अहंकार मनुष्य की बुरी वृत्ति है। अहंकारी मनुष्य को अच्छे और बुरे का विवेक नहीं होता। वह अपने घमंड में चूर रहता है और अपना भला-बुरा भी भूल जाता है। अहंकारी मनुष्य को अपनी गलती का अहसास तब होता है, जब उसकी की गई गलतियों का परिणाम उसके सामने आता है। अहंकार का परिणाम बहुत बुरा होता है। इसके कारण बड़े-बड़े ज्ञानी पुरुषों को भी मुँह की खानी पड़ती है। रावण जैसा महाज्ञानी पंडित भी अपने अहंकार। के कारण अपने कुल-परिवार सहित नष्ट हो गया। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है और उसकी मंजिल है दारुण दुख। इसलिए मनुष्य को अहंकार का मार्ग त्यागकर प्रेम और सद्गुण का मार्ग अपनाना चाहिए।

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पद्य (Poetry) (11th Standard)
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अध्याय 5.1: मध्ययुगीन काव्य - भक्ति महिमा - स्वाध्याय [पृष्ठ २१]

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बालभारती Hindi Yuvakbharati Standard 11 Maharashtra State Board
अध्याय 5.1 मध्ययुगीन काव्य - भक्ति महिमा
स्वाध्याय | Q ३. (अ) | पृष्ठ २१
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