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NCERT solutions for Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12 chapter 13 - नाभिक [Latest edition]

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NCERT solutions for Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12 chapter 13 - नाभिक - Shaalaa.com
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Solutions for Chapter 13: नाभिक

Below listed, you can find solutions for Chapter 13 of CBSE NCERT for Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12.


अभ्यास
अभ्यास [Pages 464 - 468]

NCERT solutions for Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12 13 नाभिक अभ्यास [Pages 464 - 468]

13.1Page 464
  1. लीथियम के दो स्थायी समस्थानिकों को \[\ce{^{6}_{3} Li}\] एवं \[\ce{^{7}_{3} Li}\] की बहुलता का प्रतिशत
    क्रमशः 7.5 एवं 92.5 हैं। इन समस्थानिकों के द्रव्यमान क्रमशः 6.01512 u एवं 7,01600u हैं। लीथियम का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
  2. बोरॉन के दो स्थायी, समस्थानिक \[\ce{^{10}_{5} Li}\] एवं \[\ce{^{11}_{5} B}\] हैं। उनके द्रव्यमान क्रमशः 10.01294u एवं 11.00931u एवं बोरॉन का परमाणु भार 10.811u है। \[\ce{^{10}_{5} B}\] एवं \[\ce{^{11}_{5} B}\] की बहुलता ज्ञात कीजिए।
13.2Page 464

नियॉन के तीन स्थायी समस्थानिकों की बहुलता क्रमशः 90.51%, 0.27% एवं 9.22% है। इन समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 19.99u, 20.99u एवं 21.99u हैं। नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

13.3Page 464

नाइट्रोजन नाभिक (\[\ce{_{7}^{14}N}\]) की बन्धन-ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए। mN = 14.00307 u mH = 1.00783 u, mn = 1.00867 u]

13.4Page 464

निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर \[\ce{_26^56Fe}\] एवं \[\ce{_83^209 Bi}\] नाभिकों की बंधन-ऊर्जा MeV
में ज्ञात कीजिए। m\[\ce{(_26^56Fe)}\] = 55.934939 u, m \[\ce{(_83^209Fe)}\] = 208.980388 u.

13.5Page 464

एक दिए गए सिक्के का द्रव्यमान 3.0 g है। उस ऊर्जा की गणना कीजिए जो इस सिक्के के सभी न्यूट्रॉनों एव प्रोटॉनों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक हो। सरलता के लिए मान लीजिए कि सिक्का पूर्णतः \[\ce{_29^63Cu}\] परमाणुओं का बना है। (\[\ce{_29^63Cu}\] का द्रव्यमान = 82,92960 u)।

13.6Page 464

निम्नलिखित के लिए नाभिकीय समीकरण लिखिए

  1. \[\ce{_88^226Ra}\] का α- क्षय
  2. \[\ce{_94^242Pu}\] का α- क्षय
  3. \[\ce{_15^32 P}\] P का β - क्षय
  4. \[\ce{_210^83Bi}\] का β - क्षय
  5. \[\ce{_6^11C}\] का β+ - क्षय
  6. \[\ce{_43^97Tc}\] Tc का β+ - क्षय
  7. \[\ce{_54^120Xe}\] का इलेक्ट्रॉन अभिग्रहण
13.7 - (a)Page 464

एक रेडियोऐक्टिव समस्थानिक की अर्धायु T वर्ष है। कितने समय के बाद इसकी ऐक्टिवता, प्रारम्भिक ऐक्टिवता की 3.125% रह जाएगी।

13.7 - (b)Page 464

एक रेडियोऐक्टिव समस्थानिक की अर्धायु T वर्ष है। कितने समय के बाद इसकी ऐक्टिवता, प्रारम्भिक ऐक्टिवता की 1% रह जाएगी।

13.8Page 464

जीवित कार्बनयुक्त द्रव्य की सामान्य ऐक्टिवता, प्रति ग्राम कार्बन के लिए 15 क्षय प्रति मिनट है। यह ऐक्टिवता, स्थायी समस्थानिक \[\ce{_{ 6 }^{ 14 }{ C }}\] के साथ-साथ अल्प मात्रा में विद्यमान रेडियोऐक्टिव \[\ce{_{6}^{12}{C}}\] के कारण होती है। जीव की मृत्यु होने पर वायुमण्डल के साथ इसकी अन्योन्य क्रिया (जो उपर्युक्त सन्तुलित ऐक्टिवता को बनाए रखती है) समाप्त हो जाती है तथा इसकी ऐक्टिवता कम होनी शुरू हो जाती है।\[\ce{_{ 6 }^{ 14 }{ C }}\] की ज्ञात अर्धायु (5730 वर्ष) और नमूने की मापी गई ऐक्टिवता के आधार पर इसकी सन्निकट आयु की गणना की जा सकती है। यही पुरातत्व विज्ञान में प्रयुक्त होने वाली \[\ce{_{ 6 }^{ 14 }{ C }}\] कालनिर्धारण (dating) पद्धति का सिद्धान्त है। यह मानकर कि मोहनजोदड़ो से प्राप्त किसी नमूने की ऐक्टिवता 9 क्षय प्रति मिनट प्रति ग्राम कार्बन है। सिन्धु घाटी सभ्यता की सन्निकट आयु का आकलन कीजिए।

13.9Page 465

8.0 mCi सक्रियता का रेडियोऐक्टिव स्रोत प्राप्त करने के लिए \[\ce{_{27}^{60}{Co}}\] की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी? \[\ce{_{27}^{60}{Co}}\] की अर्धायु 5.3 वर्ष है।

13.10Page 465

\[\ce{_{38}^{90}{Sr}}\] की अर्धायु 28 वर्ष है। इस समस्थानिक के 15 mg की विघटन दर क्या है?

13.11Page 465

स्वर्ण के समस्थानिक \[\ce{_{79}^{197}{Au}}\] एवं रजत के समस्थानिक \[\ce{_{47}^{107}{Ag}}\] की नाभिकीय त्रिज्या के अनुपात का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए।

13.12Page 465

(a) \[\ce{_{88}^{226}{Ra}}\] एवं (b) \[\ce{_{86}^{220}{Rn}}\] नाभिकों के α-क्षय में उत्सर्जित -कणों का Q-मान एवं गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

दिया है: m (\[\ce{_{88}^{226}{Ra}}\]) = 226.02540 u, m(\[\ce{_{86}^{220}{Rn}}\]) = 222.01750 u
m(\[\ce{_{86}^{220}{Rn}}\]) = 220.01137 u, m(\[\ce{_{84}^{216}{Po}}\]) = 216.00189 u

13.13Page 465

रेडियोन्यूक्लाइड \[\ce{_{6}^{11}{C}}\] का क्षय निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है,

\[\ce{_6^11C -> _5^11B + e^+ + \text{v}}\]; T1/2 = 20.3 min

उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम ऊर्जा 0.960 Mev है। द्रव्यमानों के निम्नलिखित मान दिए गए हैं

\[\ce{m (_6^11C) = 11.011434 u}\] तथा \[\ce{m(_6^11B) = 11.009305 u}\],

Q-मान की गणना कीजिए एवं उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के मान से इसकी तुलना कीजिए।

13.14Page 465

\[\ce{_{10}^{23}{Ne}}\] का नाभिक, β उत्सर्जन के साथ क्षयित होता है। इस β-क्षय के लिए समीकरण लिखिए और उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

m (\[\ce{_{10}^{23}{Ne}}\]) = 22.994466 u m(\[\ce{_{10}^{23}{Na}}\]) = 22.089770 u

13.15Page 465

किसी नाभिकीय अभिक्रिया A + b→ C + d का Q-मान निम्नलिखित समीकरण द्वारा परिभाषित होता है: Q= [mA +mb – mc – md] c2
जहाँ दिए गए द्रव्यमान, नाभिकीय विराम द्रव्यमान (rest mass) हैं। दिए गए आँकड़ों के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी हैं या ऊष्माशोषी।

(i) \[\ce{_1^1 H + _1^3 H -> _1^2 H + _1^2 H}\]

(ii) \[\ce{_6^12 C + _6^12 C -> _10^20 Ne + _2^4 He}\]

दिए गए परमाणु द्रव्यमान इस प्रकार हैं:

m\[\ce{(_1^2H)}\] = 2.014102 u

m\[\ce{(_1^3H)}\] = 3.016049 u

m\[\ce{(_6^12C)}\] = 12.000000u

m\[\ce{(_10^20 Ne)}\] = 19.992439 u

13.16Page 465

माना कि हम \[\ce{_{26}^{56}{Fe}}\] नाभिक के दो समान अवयवों \[\ce{_{13}^{28}{Al}}\] में विखण्डन पर विचार करें।
क्या ऊर्जा की दृष्टि से यह विखण्डन सम्भव है? इस प्रक्रम का Q-मान ज्ञात करके अपना तर्क प्रस्तुत करें।
दिया है : m(\[\ce{_{26}^{56}{Fe}}\]) = 55.93494 u एवं m(\[\ce{_{13}^{28}{Al}}\]) = 27.98191 u.

13.17Page 465

\[\ce{_{94}^{239}{Pu}}\] के विखण्डन गुण बहुत कुछ \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] से मिलते-जुलते हैं। प्रति विखण्डन विमुक्त औसत ऊर्जा 180 MeV है। यदि 1kg शुद्ध \[\ce{_{94}^{239}{Pu}}\] के सभी परमाणु विखण्डित हों तो कितनी MeV ऊर्जा विमुक्त होगी?

13.18Page 465

किसी 1000 MW विखण्डन रिएक्टर के आधे ईधन का 5.00 वर्ष में व्यय हो जाता है। प्रारम्भ में इसमें कितना \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] था? मान लीजिए कि रिएक्टर 80% समय कार्यरत रहता है, इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] के विखण्डन से ही उत्पन्न हुई है; तथा \[\ce{_{92}^{235}{U}}\] एन्यूक्लाइड केवल विखण्डन प्रक्रिया में ही व्यय होता है।

13.19Page 466

2.0 kg ड्यूटीरियम के संलयन से एक 100 वाट का विद्युत लैम्प कितनी देर प्रकाशित रखा जा सकता है? संलयन अभिक्रिया निम्नवत् ली जा सकती है।

\[\ce{_1^2H + _1^2H -> _2^3He + n + 3.27 MeV}\]

13.20Page 466

दो ड्यूट्रॉनों के आमने-सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (संकेत-कूलॉम अवरोध की ऊँचाई का मान इन ड्यूट्रॉन के बीच लगने वाले उस कूलॉम प्रतिकर्षण बल के बराबर होता है जो एक-दूसरे को सम्पर्क में रखे जाने पर उनके बीच आरोपित होता है। यह मान सकते हैं कि ड्यूट्रॉन 2.0 fm प्रभावी त्रिज्या वाले दृढ़ गोले हैं।)

13.21Page 466

समीकरण R= R0A1/3 के आधार पर, दर्शाइए कि नाभिकीय द्रव्य को घनत्व लगभग अचर है (अर्थात् A पर निर्भर नहीं करता है)। यहाँ R0 एक नियतांक है एवं A नाभिक की द्रव्यमान संख्या है।

13.22Page 466

किसी नाभिक से β+ (पॉजिट्रॉन) उत्सर्जन की एक अन्य प्रतियोगी प्रक्रिया है जिसे इलेक्ट्रॉन परिग्रहण (Capture) कहते हैं (इसमें परमाणु की आंतरिक कक्षा, जैसे कि K-कक्षा, से नाभिक एक इलेक्ट्रॉन परिगृहीत कर लेता है और एक न्यूट्रिनो, ν उत्सर्जित करता है)।

\[\ce{e^+ + _Z^AX -> _{Z-1}^AY + \text{v}}\]

दर्शाइए कि यदि β+ उत्सर्जन ऊर्जा विचार से अनुमत है तो इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी आवश्यक रूप से अनुमत है, परन्तु इसका विलोम अनुमत नहीं है।

अतिरिक्त अभ्यास

13.23Page 466

आवर्त सारणी में मैग्नीशियम का औसत परमाणु द्रव्यमान 24.312u दिया गया है। यह औसत मान, पृथ्वी पर इसके समस्थानिकों की सापेक्ष बहुलता के आधार पर दिया गया है। मैग्नीशियम के तीनों समस्थानिक तथा उनके द्रव्यमान इस प्रकार हैं

\[\ce{_{12}^{24}{Mg}}\] (28.98504 u), \[\ce{_{12}^{25}{Mg}}\] (24.98584) एवं \[\ce{_{12}^{26}{Mg}}\] (25.98259 u)। प्रकृति में प्राप्त मैग्नीशियम में \[\ce{_{12}^{24}{Mg}}\] की (द्रव्यमान के अनुसार) बहुलता 78.99% है। अन्य दोनों समस्थानिकों की बहुलता का परिकलन कीजिए।

13.24Page 466

न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा (Separation energy), परिभाषा के अनुसार वह ऊर्जा है, जो किसी नाभिक से एक न्यूट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है। नीचे दिए गए आँकड़ों का इस्तेमाल करके \[\ce{_{20}^{41}{Ca}}\] एवं \[\ce{_{13}^{27}{Al}}\] नाभिकों की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

`"m"(""_20^40"Ca")` = 39.962591 u

`"m"(""_20^41"Ca")` = 40.962278 u

`"m"(""_13^26"Al")` = 25.986895 u

`"m"(""_13^27"Al")` = 26.981541 u

13.25Page 466

किसी स्रोत में फॉस्फोरस के दो रेडियो न्यूक्लाइड निहित हैं \[\ce{_{15}^{32}{P}}\] (T1/2 = 14.3 d) एवं \[\ce{_{15}^{33}{P}}\] (1/2 = 25.3d)। प्रारम्भ में \[\ce{_{15}^{33}{P}}\] से 10% क्षय प्राप्त होता है। इससे 90% क्षय प्राप्त करने के लिए कितने समय प्रतीक्षा करनी होगी?

13.26Page 466

कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में एक नाभिक, α -कण से अधिक द्रव्यमान वाला एक कण उत्सर्जित करके क्षयित होता है। निम्नलिखित क्षय-प्रक्रियाओं पर विचार कीजिए

\[\ce{_88^223Ra -> _82^209Pb + _6^14C}\]

\[\ce{_88^223Ra -> _86^219Rn + _2^4He}\]

इन दोनों क्षय प्रक्रियाओं के लिए Q-मान की गणना कीजिए और दर्शाइए कि दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा की दृष्टि से सम्भव हैं।

13.27Page 466

तीव्र न्यूट्रॉनों द्वारा \[\ce{_{92}^{238}{U}}\] के विखण्डन पर विचार कीजिए। किसी विखण्डन प्रक्रिया में प्राथमिक अंशों (Primary fragments) के बीटा-क्षय के पश्चात कोई न्यूट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता तथा \[\ce{_{58}^{140}{P}}\] तथा \[\ce{_{34}^{99}{Ru}}\] अन्तिम उत्पाद प्राप्त होते हैं। विखण्डन प्रक्रिया के लिए के मान का परिकलन कीजिए। आवश्यक आँकड़े इस प्रकार हैं

m(\[\ce{_{92}^{238}{U}}\]) = 238.05079 u

m(\[\ce{_{58}^{140}{Ce}}\]) = 139.90543 u

m(\[\ce{_{34}^{99}{Ru}}\]) = 98.90594 u

13.28Page 467

D.T अभिक्रिया (ड्यूटीरियम-ट्राइटियम संलयन), \[\ce{_{1}^{2}{H} + _{1}^{3}{H} → _{2}^{4}{He} + n}\] पर विचार कीजिए।

(a) नीचे दिए गए आँकड़ों के आधार पर अभिक्रिया में विमुक्त ऊर्जा का मान Mev में ज्ञात कीजिए।

`"m"(""_1^2 "H")` = 2.014102 u

`"m"(""_1^3 "H")` = 3.016049 u

(b) इयूटीरियम एवं ट्राइटियम दोनों की त्रिज्या लगभग 1.5 fm मान लीजिए। इस अभिक्रिया में, दोनों नाभिकों के मध्य कूलॉम प्रतिकर्षण से पार पाने के लिए कितनी गतिज ऊर्जा की आवश्यकता है? अभिक्रिया प्रारम्भ करने के लिए गैसों (0 तथा 1 गैसें) को किस ताप तक ऊष्मित कि या जाना चाहिए?

(संकेत : किसी संलयन क्रिया के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा = संलयन क्रिया में संलग्न कणों की औसत तापीय गतिज ऊर्जा = 2 (3KT/2); K: बोल्ट्ज़मान नियतांक तथा T = परम ताप)

13.29Page 467

नीचे दी गई क्षय-योजना में, γ-क्षयों की विकिरण आवृत्तियाँ एवं β-कणों की अधिकतम गतिज ऊर्जाएँ ज्ञात कीजिए। दिया है:

m(198Au) = 197.968233 u

m(198Hg) =197.966760 u

13.30Page 468

सूर्य के अभ्यंतर में (a) 1kg हाइड्रोजन के संलयन के समय विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (b) विखण्डन रिएक्टर में 1.0 kg \[^{235}{\text{U}}\] के विखण्डन में विमुक्त ऊर्जा का परिकलेन कीजिए। (c) प्रश्न के खण्ड (a) तथा (b) में विमुक्त ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।

13.31Page 468

मान लीजिए कि भारत का लक्ष्य 2020 तक 200,000 MW विद्युत शक्ति जनन का है। इसका 10% नाभिकीय शक्ति संयंत्रों से प्राप्त होना है। माना कि रिएक्टर की औसत उपयोग दक्षता (ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तित करने की क्षमता) 25% है। 2028 के अन्त तक हमारे देश को प्रति वर्ष कितने विखण्डनीय यूरेनियम की आवश्यकता होगी। \[\ce{^{235}{U}}\] प्रति विखण्डन उत्सर्जित ऊर्जा 200 MeV है।

Solutions for 13: नाभिक

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