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Science (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] - CBSE Question Bank Solutions

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कातर दृष्टि से चारों तरफ़ प्रियतम को ढूँढ़ने की मनोदशा को कवि ने किन शब्दों में व्यक्त किया है?

[1.09] विद्यापति : पद
Chapter: [1.09] विद्यापति : पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।

[1.09] विद्यापति : पद
Chapter: [1.09] विद्यापति : पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।
[1.09] विद्यापति : पद
Chapter: [1.09] विद्यापति : पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान।
कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान।।

[1.09] विद्यापति : पद
Chapter: [1.09] विद्यापति : पद
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देवी सरस्वती की उदारता का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता?

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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चारमुख, पाँचमुख और षटमुख किन्हें कहा गया है और उनका देवी सरस्वती से क्या संबंध है?

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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कविता में पंचवटी के किन गुणों का उल्लेख किया गया है?

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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तीसरे छंद में संकेतित कथाएँ अपने शब्दों में लिखिए?

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

पति बर्नै चारमुख पूत बर्नै पंच मुख नाती बर्नै षटमुख तदपि नई-नई।

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।

भावी भूत बर्तमान जगत बखानत है 'केसोदास' क्यों हू ना बखानी काहू पै गई।

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।

अघओघ की बेरी कटी बिकटी निकटी प्रकटी गुरूजान-गटी।

[1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
Chapter: [1.1] केशवदास : रामचंद्रचंद्रिका
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कवि ने 'चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को' क्यों कहा है?

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
बहुत दिनान को अवधि आसपास परे/खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
मौन हू सौं देखिहौं कितेक पन पालिहौ जू/कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहै।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
झूठी बतियानि की पत्यानि तें उदास है, कै ______ चाहत चलन ये संदेशो लै सुजान को।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
जान घनआनंद यों मोहिं तुम्है पैज परी ______ कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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हिंदी-उर्दू के विषय में लेखक के विचारों को देखिए। आप इन दोनों को एक ही भाषा की दो शैलियाँ मानते हैं या भिन्न भाषाएँ?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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भारतेंदु मंडल के प्रमुख लेखकों के नाम और उनकी प्रमुख रचनाओं की सूची बनाकर स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक हिंदी गद्य के विकास में इन लेखकों का क्या योगदान रहा?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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