Advertisements
Advertisements
Question
देवी सरस्वती की उदारता का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता?
Advertisements
Solution
देवी सरस्वती सुर, कला तथा ज्ञान की देवी हैं। इस संसार में सबके गले में वह विराजती है। इस संसार में ज्ञान का अथाह भंडार उनकी ही कृपा से उत्पन्न हुआ है। उनकी महत्ता को व्यक्त करना किसी के भी वश में नहीं है क्योंकि उनकी महत्ता को शब्दों का जामा पहनाकर उसे बांधा नहीं जा सकता है। सदियों से कई विद्वानों ने सरस्वती की महिमा को व्यक्त करना चाहता है परन्तु वे उसमें पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाए हैं। जितना भी उसे व्यक्त करने का प्रयास किया गया, उतना ही कम प्रतीत होता है। उनमें अभी इतना बल नहीं है कि वह सरस्वती की महिमा को समझ पाएँ। अतः उनकी उदारता का गुणगान मनुष्य के वश में नहीं है।
RELATED QUESTIONS
चारमुख, पाँचमुख और षटमुख किन्हें कहा गया है और उनका देवी सरस्वती से क्या संबंध है?
कविता में पंचवटी के किन गुणों का उल्लेख किया गया है?
तीसरे छंद में संकेतित कथाएँ अपने शब्दों में लिखिए?
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
पति बर्नै चारमुख पूत बर्नै पंच मुख नाती बर्नै षटमुख तदपि नई-नई।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।
भावी भूत बर्तमान जगत बखानत है 'केसोदास' क्यों हू ना बखानी काहू पै गई।
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।
अघओघ की बेरी कटी बिकटी निकटी प्रकटी गुरूजान-गटी।
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
चहुँ ओरनि नाचति मुक्तिनटी गुन धूरजटी वन पंचवटी।
निम्नलिखित पंक्ति का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
सिंधु तर यो उनको बनरा तुम पै धनुरेख गई न तरी।
निम्नलिखित पंक्तिय का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
तेलन तूलनि पूँछि जरी न जरी, जरी लंक जराई-जरी।
