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Arts (English Medium) Class 12 - CBSE Question Bank Solutions

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कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।
[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। सुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

[6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
Chapter: [6] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : बादल राग
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कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?
[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
Chapter: [8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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टिप्पणी करें

गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।

[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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टिप्पणी करें

सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व।

[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
Chapter: [8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।
[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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कविता में एक भाव, एक विचार होते हुए भी उसका अंदाज़े बयाँ या भाषा के साथ उसका बर्ताव अलग-अलग रूप में अभिव्यक्ति पाता है। इस बात को ध्यान रखते हुए नीचे दी गई कविताओं को पढ़िए और दी गई फ़िराक की गज़ल-रुबाई में से समानार्थी पंक्तियाँ ढूँढ़िए।

(क) मैया मैं तो चंद्र खिलौनो लैहों।

–सूरदास 

(ख) वियोगी होगा पहला कवि
       आह से उपजा होगा गान
       उमड़ कर आँखों से चुपचाप
       बही होगी कविता अनजान

–सुमित्रानंदन पंत 

(ग) सीस उतारे भुईं धरे तब मिलिहैं करतार

–कबीर

[8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
Chapter: [8] फ़िराक गोरखपुरी : रुबाइयाँ
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छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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‘रस का अक्षयपात्र’ से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की और इंगित किया है?

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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व्याख्या करें-

शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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व्याख्या करें-

रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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