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धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

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Question

धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

Very Long Answer
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Solution

तुलसीदास जी आदर्शवादी विचारधारा के कवि थे। उनके व्यक्तित्व में बचपन से ही गहरा आत्मसम्मान और स्वाभिमान विद्यमान था। वे भगवान राम के अनन्य भक्त थे और पूर्ण निष्ठा के साथ उनकी भक्ति में समर्पित रहे। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया तथा जीवनभर एकाग्र भाव से राम की उपासना करते रहे। समाज द्वारा किए गए तानों और आलोचनाओं का उन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। उनका जीवन अनेक कठिनाइयों और भटकावों से भरा रहा, फिर भी वे किसी पर निर्भर नहीं हुए और न ही किसी प्रकार के लेन-देन के संबंधों में पड़े। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-पाति और धार्मिक रूढ़ियों का साहसपूर्वक विरोध किया। बाहरी रूप से वे अत्यंत सरल, विनम्र और सहज दिखाई देते थे, किंतु उनके भीतर एक दृढ़ स्वाभिमानी और समर्पित भक्त का हृदय विद्यमान था।

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कवितावली (उत्तर कांड से)
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Chapter 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [Page 44]

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NCERT Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 7 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 4. | Page 44

RELATED QUESTIONS

कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।


तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?


व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।


व्याख्या करें-

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।


पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।

तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।

यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।

‘कवितावली’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास को अपने समय की आर्थिक-सामाजिक समस्याओं की समझ थी।


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