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Question
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Solution
तुलसी के समय में बेकारी के बहुत कारण रहे होंगे। वे इस प्रकार हैं-
- अत्यधिक लगान
- प्रकृति प्रकोप (सूखा या बाढ़)
- मुस्लिम शासकों द्वारा लगाए गए अनैतिक कर
- मंत्रियों द्वारा शोषण
आज के समय में बेकारी की समस्या के पीछे निम्नलिखित कारण हैं-
- शिक्षा का अभाव
- कृषि के प्रति लोगों में उपेक्षा भाव
- प्रकृति का प्रकोप (सूखा या बाढ़)
- अत्यधिक कर्ज
- मशीनों का अत्यधिक प्रयोग जिसके कारण फैक्टरी में लोगों की आवश्यकता कम हो जाना
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कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।
तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?
धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?
धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?
व्याख्या करें-
माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।
व्याख्या करें-
ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।
‘कवितावली’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास को अपने समय की आर्थिक-सामाजिक समस्याओं की समझ थी।
