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Question
इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।
Very Long Answer
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Solution
कवि ने अपनी रचना को प्रभावशाली, सहज और लोकजीवन के निकट बनाने के लिए हिंदी, उर्दू तथा लोकभाषा के शब्दों का सुंदर प्रयोग किया है।
हिंदी के प्रयोग
- आँगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी,
हाथों पे झुलाती है उसे गोद-भरी। - आँगन में ठुनक रहा है ज़िदयाया है,
बालक तो हई चाँद पै ललचाया है।
दर्पण उसे दे के कह रही है माँ,
देख आईने में चाँद उतर आया है।
उर्दू के प्रयोग
- उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके।
- देख आईने में चाँद उतर आया है।
लोक-भाषा के प्रयोग
- रह-रह के हवा में जो लोका देती है।
- जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े।
- आँगन में ठुनक रहा है ज़िदयाया है।
- बालक तो हई चाँद पै ललचाया है।
इस प्रकार कवि ने हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के शब्दों का समन्वित प्रयोग करके कविता को सरल, स्वाभाविक, मधुर तथा लोक-संवेदना से युक्त बना दिया है।
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रुबाइयाँ
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