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प्रश्न
इन रुबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोग इस प्रकार हैं-
- लोता देती है
- घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपड़े
- गेसुओं में कंघी करके
- रूपवती मुखड़े पै इक नर्म दमक
- ज़िदयाया है
- रस की पुतली
- आईने में चाँद उतर आया है
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रुबाइयाँ
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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कविता में एक भाव, एक विचार होते हुए भी उसका अंदाज़े बयाँ या भाषा के साथ उसका बर्ताव अलग-अलग रूप में अभिव्यक्ति पाता है। इस बात को ध्यान रखते हुए नीचे दी गई कविताओं को पढ़िए और दी गई फ़िराक की गज़ल-रुबाई में से समानार्थी पंक्तियाँ ढूँढ़िए।
| (क) मैया मैं तो चंद्र खिलौनो लैहों।
–सूरदास
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| (ख) वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
उमड़ कर आँखों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान –सुमित्रानंदन पंत
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| (ग) सीस उतारे भुईं धरे तब मिलिहैं करतार
–कबीर
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