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फ़िराक ने सुनो हो, रक्खो हो आदि शब्द मीर की शायरी के तर्ज़ पर इस्तेमाल किए हैं। ऐसे ही मीर की कुछ गज़लें ढूँढ़ कर लिखिए।

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प्रश्न

फ़िराक ने सुनो हो, रक्खो हो आदि शब्द मीर की शायरी के तर्ज़ पर इस्तेमाल किए हैं। ऐसे ही मीर की कुछ गज़लें ढूँढ़ कर लिखिए।
दीर्घउत्तर
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उत्तर

  • पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
  1. पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
    जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है
  2. लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश के बाले तक
    उस को फ़लक चश्म-ए-मै-ओ-ख़ोर की तितली का तारा जाने है
  3. आगे उस मुतक़ब्बर के हम ख़ुदा ख़ुदा किया करते हैं
    कब मौजूद् ख़ुदा को वो मग़रूर ख़ुद-आरा जाने है
  4. आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में
    जी के ज़िआँ को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है
  5. चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
    वर्ना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है
  6. क्या ही शिकार-फ़रेबी पर मग़रूर है वो सय्यद बच्चा
    त'एर उड़ते हवा में सारे अपनी उसारा जाने है
  7. मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं
    और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है
  8. क्या क्या फ़ितने सर पर उसके लाता है माशूक़ अपना
    जिस बेदिल बेताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है
  9. आशिक़ तो मुर्दा है हमेशा जी उठता है देखे उसे
    यार के आ जाने को यकायक उम्र दो बारा जाने है
  10. रख़नों से दीवार-ए-चमन के मूँह को ले है छिपा यअनि
    उन सुराख़ों के टुक रहने को सौ का नज़ारा जाने है
  11. तशना-ए-ख़ूँ है अपना कितना 'मीर' भी नादाँ तल्ख़ीकश
    दमदार आब-ए-तेग़ को उस के आब-ए-गवारा जाने है
  • मीरे के कुछ शेर
  1. दिल वो नगर नहीं कि फिर आबाद हो सके पछताओगे सुनो हो , ये बस्ती उजाड़कर
  2. मैं रोऊँ तुम हँसो हो, क्या जानो 'मीर' साहब
    दिल आपका किसू से शायद लगा नहीं है
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गज़ल
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पाठ 8: फ़िराक गोरखपुरी (रुबाइयाँ) - अभ्यास [पृष्ठ ६०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 8 फ़िराक गोरखपुरी (रुबाइयाँ)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ६०
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