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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए: इस भौतिक जीवन में मनुष्य बहुत खुश है।

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Question

शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

इस भौतिक जीवन में मनुष्य बहुत खुश है।

One Line Answer
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Solution

आधुनिक युग में मनुष्य आध्यात्मिक जीवन से दूर होता जा रहा है।

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व्याकरण
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Chapter 1.02: बिल्ली का बिलुंगड़ा - भाषा बिंदु [Page 7]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.02 बिल्ली का बिलुंगड़ा
भाषा बिंदु | Q (८) | Page 7

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ध्यान दीजिए नुक्ता लगाने से शब्द के अर्थ में परिवर्तन हो जाता है। पाठ में दफा’ शब्द का प्रयोग हुआ है जिसका अर्थ होता है-बार (गणना संबंधी), कानून संबंधी। यदि इस शब्द में नुक्ता लगा दिया जाए तो शब्द बनेगा ‘दफ़ा’ जिसका अर्थ होता है-दूर करना, हटाना। यहाँ नीचे कुछ नुक्तायुक्त और नुक्तारहित शब्द दिए जा रहे हैं उन्हें ध्यान से देखिए और अर्थगत अंतर को समझिए।
सजा – सज़ा
नाज – नाज़
जरा – ज़रा
तेज – तेज


निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए-

  1. आजकल _________ बहुत खराब है। (जमाना/जमाना)
  2. पूरे कमरे को _________  दो। (सजा/सजा)
  3. _________  चीनी तो देना। (जरा/जरा)
  4. माँ दही _________  भूल गई। (जमाना/जमाना)
  5. दोषी को _________  दी गई। (सजा/सज़ा)
  6. महात्मा के चेहरे पर _________ था। (तेज/तेज़)

निम्‍न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो 

पुस्‍तक


निम्‍नलिखित शब्द के आधार पर मुहावरे लिखकर उनका अपने वाक्‍य में प्रयोग करो।

ईंट


निम्‍न शब्‍द के पर्यायवाची शब्‍द लिखिए:


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए :

भारत की अलौकिकता सारे विश्व में फैली है।


निम्न वाक्‍य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्‍य खोजकर लिखिए:

हे मानव, मुझे क्षमा कर मैं पृथ्‍वी से बहुत दूर पहुँच चुका हूँ।


चित्र देखकर संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया इन शब्द के भेदों के आधार पर उचित वाक्य बनाओ और तालिका में शब्द लिखाे:

 

संज्ञा शब्द सर्वनाम शब्द विशेषण शब्द क्रिया शब्द
       
       
       

निम्नलिखित शब्द के युग्म शब्द बताओ और वाक्य में उचित शब्दयुग्म लिखो:

घर - ______

दीपावली में ______ मिठाइयॉं बनती हैं।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

मैं कर्ज में डूबा था परंतु मुझे असंतोष न था।


अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

बच्चे हँसते-हँसते खेल रहे थे।


‘रमेश पुस्तक पढ़ता है।’ इस वाक्य को सभी काल में परिवर्तित करके भेदों सहित बताओ और लिखो।


दर्पण में देखकर पढ़ो।


निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

ने ______
को ______
से ______
को ______
से ______
का, की, के ______
में, पर ______
अरे! ______

निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।

 


पढ़ो :

विभिन्नता से जुड़ें हम

दर्जी  गंधर्व 
इंद्रधनुष  चन्द्रमा 
मेट्रो रेल  महाराष्ट्र

निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्‍द रिक्‍त स्‍थान में लिखिए:-

शब्द पर्यायवाची शब्द
पवन        

अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

वहाँ कोई लगभग एक दर्जन सेब रहे होंगे।


शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

पंक्‍ति


शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

अनेक


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

द्रव्य उपादान कारण शक्कर से मिठाई बनाई जाती है


शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ अपमान ×

शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ दुर्लभ ×

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
निर्विघ्न ______ + ______  

पाठ्यपुस्‍तक की पहली इकाई के १ से ६ पाठों से भेदों सहित संज्ञाओं को ढूँढ़कर उनका वाक्‍यों में प्रयोग कीजिए।


परिच्छेद में आए सर्वनामों की सूची तैयार कीजिए।

           भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्‍ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्‍ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा।

           काठमांडू से एवरेस्‍ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्‍ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्‍था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्‍द हमने १९००० फीट पर स्‍थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्‍ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्‍था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्‍ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

हमें सदैव अपने लिए किए गए कामों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए ।


शब्‍द-युग्‍म पूरे करते हुए वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

घर - 


निम्‍नलिखित मुहावरा, कहावत में गलत शब्‍द के स्‍थान पर सही शब्‍द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए:

गीत न जाने आँगन टेढ़ा


नीचे दिए गए विरामचिह्न के सामने उनके नाम लिखकर इनका उपयोग करते हुए वाक्य बनाइए:

चिह्न नाम वाक्य
( )    

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