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शब्‍द के लिंग पहचानिए: झरना = ______

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Question

शब्‍द के लिंग पहचानिए:

झरना = ______

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Solution

झरना = पुल्लिंग

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व्याकरण
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Chapter 1.1: पृथ्‍वी-आकाश - स्वाध्याय [Page 42]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.1 पृथ्‍वी-आकाश
स्वाध्याय | Q (२) (ख) | Page 42

RELATED QUESTIONS

सहायक क्रिया का वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

रहना


निम्नलिखित शब्द का वचन बदलकर वाक्य में प्रयोग करके लिखो:

रोटी → 


उचित विराम चिह्न लगाओ:

                                    घर
किसी दिन हम भी आपके आएँगे।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :

राघव ने चुपचाप घर में प्रवेश किया।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

शौनक बड़ी बहन के साथ विद्यालय जाने की तैयारी में लग गया।


निम्न प्रकार से मात्रा एवं चिह्नवाले अन्य शब्द बताओ:

काला   बुलबुल   कृपाण   केले   प्रातः
                 
रूमाल   नूपुर   खपरैल   खरगोश   लीची
                 
चौदह   हृदय   चौकोर   पतंग   कुआँ
                 
चिड़िया   पैसे   तितली   संख्याऍं   डॉक्‍टर

पढ़ो :

आधे होकर जुड़ें हम 

मक्खी  सिक्का 
रफ़्तार  डॉक्टर 
शगुफ्ता  मुजफ्फर

शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

पंक्‍ति


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

ऐसा एक भी मनुष्य नहीं जो संसार में कुछ न कुछ लाभकारी कार्य न कर सकता हो


परिच्छेद में आए सर्वनामों की सूची तैयार कीजिए।

           भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्‍ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्‍ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा।

           काठमांडू से एवरेस्‍ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्‍ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्‍था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्‍द हमने १९००० फीट पर स्‍थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्‍ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्‍था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्‍ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


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