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विज्ञापन पढ़िए और शब्‍द युग्‍म ढूँढ़कर लिखिए: हस्‍तकला वस्‍तुओं की प्रदर्शनी भारत के विविध राज्‍यों में हाथों से बनाई गई वस्‍तुओं की भव्य प्रदर्शनी आपके शहर में ! कालावधि: २० अक्‍तूबर २०१७

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Question

विज्ञापन पढ़िए और शब्‍द युग्‍म ढूँढ़कर लिखिए:

खुश खबर ! खुश खबर !! खुश खबर !!!
हस्‍तकला वस्‍तुओं की प्रदर्शनी

भारत के विविध राज्‍यों में हाथों से बनाई गई वस्‍तुओं की
भव्य प्रदर्शनी आपके शहर में !

कालावधि: २० अक्‍तूबर २०१७ से ३० अक्‍तूबर २०१७
समय: सुबह ११:०० से रात ९:०० तक
स्‍थान: गणेश कला क्रीड़ा मंदिर, पुणे

खरीदारी पर आकर्षक छूट !

साथ-ही-साथ विविध राज्‍यों के खाद्य व्यंजनों के ठेले

(स्‍टॉल्‍स्‌) (गाँव-शहर के छोटे-बड़े, बाल-वृद्‌ध, महिला-पुरुष सभी
घूमते-फिरते, हँसते-हँसते, खान-पान का स्‍वाद ले सकते हैं।)

प्रवेशः निःशुल्क

One Line Answer
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Solution

गाँव-शहर, छोटे-बड़े, बाल-बच्चे, महिला-पुरुष, घूमते-फिरते, हँसते-हँसते, खान-पान।

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व्याकरण
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Chapter 2.12: सच का सौदा - स्वाध्याय [Page 112]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.12 सच का सौदा
स्वाध्याय | Q (१) | Page 112

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अर्थ के अनुसार वाक्‍यों के प्रकार ढूँढ़कर लिखो।


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________

__________________


निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

ने ______
को ______
से ______
को ______
से ______
का, की, के ______
में, पर ______
अरे! ______

निम्न पत्र में आए कालों के वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए तथा निर्देशानुसार परिवर्तित करके पुनः लिखिए:-

धन्यवाद पत्र

______ घर क्र.

______ ग्राम/शहर

______ जिला

दिनांक ______

सम्माननीय .................... जी

        सादर नमस्कार।

      मैं आपको नहीं जानता। आप मुझे नहीं जानते। मेरे और आपके बीच एक ही नाता है - एक भले इनसान का। मैं आपके द्वारा भिजवाई गई अटैची को पाकर हृदय से कृतज्ञ हूँ। मेरा रोम-रोम आपको शुभकामना दे रहा है।

      मैं रेलगाड़ी में भूली हुई अटैची के कारण बहुत परेशान था। मेरे सारे सर्टीफिकेट, पैसे, महत्त्वपूर्ण कागजात उस अटैची में थे। पिछले तीन दिनों की अथक कोशिश के बाद मेरा मन निराश हो चुका था। मुझे लगने लगा था कि जैसे इस दुनिया में ईमानदारी बची ही नहीं है परंतु आपने मेरी अटैची अपने बेटे के हाथों भेजकर मेरी सारी निराशा को आशा में बदल दिया। तब से मैं बहुत प्रसन्न हूँ।

      मान्यवर! आपकी ईमानदारी ने सचमुच मुझे नया विश्वास दिया है। आप विश्वास रखिए, भविष्य में मैं किसी की भी परेशानी दूर करने का प्रयास करूँगा।
      मैंने अटैची देख ली है। एक-एक वस्तु यथास्थान सुरक्षित है। आपका हृदय से धन्यवाद।

भवदीय
______

 

क्रम. काल वाक्य काल परिवर्तित वाक्य
१. सामान्य भूतकाल   सामान्य वर्तमान काल  
२. सामान्य वर्तमान काल   सामान्य भविष्यकाल  
३. सामान्य भविष्यकाल   पूर्ण भूतकाल  
४. अपूर्ण वर्तमान काल   अपूर्ण भूतकाल  
५. पूर्ण भूतकाल   सामान्य वर्तमान काल  

शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

तारा


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
महौषधि ______ + ______  

वचन बदलिए।

व्यक्‍ति = ______ 


कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

व्यक्ति को हमेशा परोपकारी वृत्ति रखनी चाहिए।


रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

मैं ______ बुलाए भी कहीं जा पहुँचता हूँ।


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