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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः ‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से

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Question

निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’

Explain
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Solution

संभव ने गंगा नदी के मध्य एक व्यक्ति को देखा जो सूर्य को जल अर्पित कर रहा था। उस व्यक्ति को देखकर संभव को महसूस हुआ कि उसके भीतर अहंकार का नामोनिशान नहीं है। वह व्यक्ति अत्यंत शांत दिखाई दे रहा था। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसने अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर दिया हो और अब उसके पास कुछ भी न हो, फिर भी वह ईश्वर की भक्ति में मग्न है। उस पवित्र व्यक्ति को देखकर संभव को लगा कि वह आत्मसम्मान से भरपूर है और उसे किसी वस्तु की कमी नहीं है। अहंकार का त्याग करने के कारण उसके जीवन में कोई कष्ट दिखाई नहीं दे रहा था।

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दूसरा देवदास
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Chapter 2.07: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [Page 127]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 2.07 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 8. (ख) | Page 127

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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

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निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

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