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‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

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Question

‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
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Solution

हर की पौड़ी पर पुजारी संभव और एक बिल्कुल अपरिचित युवती को युगल समझकर वे आशीर्वचन कह देता है जो सामान्यतः किसी नवविवाहित दंपति को कहे जाते हैं। संभव उस लड़की को चाहने लगता है और अपना सुख-चैन खो देता है। वह उससे मिलने और उसे खोजने के लिए अगले दिन भी घाट पर जाता है तथा तलाश करते-करते मनसा देवी पहुँच जाता है। वहाँ से लौटते समय उसकी अचानक उसी लड़की पारो से भेंट हो जाती है। बंगला के प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित उपन्यास देवदास का नायक ‘देवदास’ भी पारो के प्रेम में भटकता रहता है। अंततः परिचय के समय संभव भी अपने नाम के साथ देवदास जोड़ लेता है। इस प्रकार यह शीर्षक पूरी तरह सार्थक सिद्ध होता है।

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दूसरा देवदास
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Chapter 2.07: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [Page 128]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 Class 12
Chapter 2.07 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 9. | Page 128

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पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।


‘गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है’ - इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।

पुजारी ने लड़की के ‘हम’ को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?

उस छोटी-सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।

मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।

“पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।” कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।


‘मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।’
कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन दीजिए।

निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

‘तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।’


निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’


निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः

‘एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।’


‘हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।’

इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है - पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।


पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।


पारो और संभव में से आप किसके प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं और क्यों? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर उस पात्र की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।


"व्यापार यहाँ भी था।" - 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।


‘भीड़ लड़के ने दिल्‍ली में भी देखी थी, बल्कि रोज़ देखता था। लेकिन इस भीड़ का अंदाज निराला था।’ पंक्ति के माध्यम से भीड़ की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।


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