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Question
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Solution
हर की पौड़ी पर पुजारी संभव और एक बिल्कुल अपरिचित युवती को युगल समझकर वे आशीर्वचन कह देता है जो सामान्यतः किसी नवविवाहित दंपति को कहे जाते हैं। संभव उस लड़की को चाहने लगता है और अपना सुख-चैन खो देता है। वह उससे मिलने और उसे खोजने के लिए अगले दिन भी घाट पर जाता है तथा तलाश करते-करते मनसा देवी पहुँच जाता है। वहाँ से लौटते समय उसकी अचानक उसी लड़की पारो से भेंट हो जाती है। बंगला के प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित उपन्यास देवदास का नायक ‘देवदास’ भी पारो के प्रेम में भटकता रहता है। अंततः परिचय के समय संभव भी अपने नाम के साथ देवदास जोड़ लेता है। इस प्रकार यह शीर्षक पूरी तरह सार्थक सिद्ध होता है।
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पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
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