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‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

‘दूसरा देवदास’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर

हर की पौड़ी पर पुजारी संभव और एक बिल्कुल अपरिचित युवती को युगल समझकर वे आशीर्वचन कह देता है जो सामान्यतः किसी नवविवाहित दंपति को कहे जाते हैं। संभव उस लड़की को चाहने लगता है और अपना सुख-चैन खो देता है। वह उससे मिलने और उसे खोजने के लिए अगले दिन भी घाट पर जाता है तथा तलाश करते-करते मनसा देवी पहुँच जाता है। वहाँ से लौटते समय उसकी अचानक उसी लड़की पारो से भेंट हो जाती है। बंगला के प्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित उपन्यास देवदास का नायक ‘देवदास’ भी पारो के प्रेम में भटकता रहता है। अंततः परिचय के समय संभव भी अपने नाम के साथ देवदास जोड़ लेता है। इस प्रकार यह शीर्षक पूरी तरह सार्थक सिद्ध होता है।

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दूसरा देवदास
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पाठ 2.07: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १२८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 Class 12
पाठ 2.07 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 9. | पृष्ठ १२८

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