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प्रश्न
इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है - पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।
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उत्तर
पाठ से उदाहरण कुछ इस प्रकार हैं-
- गंगा सभा के स्वयंसेवक खाकी वर्दी में मुस्तैदी से घूम रहे हैं।
- यकायक सहस्र दीप जल उठते हैं पंडित अपने आसन से उठ खड़े होते हैं।
- दूसरे यह दृश्य देखने पर मालूम होता है कि वे अपना संबोधन गंगाजी के गर्भ तक पहुँचा रहे हैं।
- संभव हँसा। उसके एक-सार खूबसूरत दाँत साँवले चेहरे पर फब उठे।
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पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
“पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।” कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।
निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।’
निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
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पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।
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"व्यापार यहाँ भी था।" - 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
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