Advertisements
Advertisements
प्रश्न
“पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिठान का मधुर स्मरण हो आया।” कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।
Advertisements
उत्तर
जब लड़की के भाई के बेटे ने उसे पारो कहकर पुकारा, तो संभव को देवदास की पारो की याद आ गई। उसे याद आया कि कहानी में देवदास की प्रेमिका का नाम पारो था, और अब उसकी अपनी प्रेमिका का नाम भी पारो था। अपनी पारो के साथ रहने की चाह में संभव मनसा देवी मंदिर गया, प्रतिज्ञा के रूप में धागा बांधा और पारो से मिलने की प्रार्थना की। वह उस लड़के की सुखद यादों के साथ मंदिर से लौटा। संभव को चुपके से पारो से प्यार हो गया था। वह उसका नाम जानना चाहता था, और जब उसके भतीजे ने उसे "पारो बुआ" कहकर पुकारा, तो संभव को आखिरकार उसका नाम पता चल गया।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
पाठ के आधार पर हर की पौड़ी पर होने वाली गंगाजी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘तुझे तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।’
निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’
‘एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।’
इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है - पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।
पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।
पारो और संभव में से आप किसके प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं और क्यों? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर उस पात्र की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।
"व्यापार यहाँ भी था।" - 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
‘भीड़ लड़के ने दिल्ली में भी देखी थी, बल्कि रोज़ देखता था। लेकिन इस भीड़ का अंदाज निराला था।’ पंक्ति के माध्यम से भीड़ की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
