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प्रश्न
निम्नलिखित वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिएः
‘उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनति कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।’
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उत्तर
संभव ने गंगा नदी के मध्य एक व्यक्ति को देखा जो सूर्य को जल अर्पित कर रहा था। उस व्यक्ति को देखकर संभव को महसूस हुआ कि उसके भीतर अहंकार का नामोनिशान नहीं है। वह व्यक्ति अत्यंत शांत दिखाई दे रहा था। उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उसने अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर दिया हो और अब उसके पास कुछ भी न हो, फिर भी वह ईश्वर की भक्ति में मग्न है। उस पवित्र व्यक्ति को देखकर संभव को लगा कि वह आत्मसम्मान से भरपूर है और उसे किसी वस्तु की कमी नहीं है। अहंकार का त्याग करने के कारण उसके जीवन में कोई कष्ट दिखाई नहीं दे रहा था।
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