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‘हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।’

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प्रश्न

‘हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।’
स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

प्रस्तुत पंक्ति में संभव ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहता है कि उसे यह ज्ञात नहीं था कि मौन रहकर ईश्वर के समक्ष हृदय की भावनाओं को प्रकट करने की प्रार्थना इतनी शीघ्र पूरी हो जाएगी। उसने मनसा देवी में धागा बाँधकर उस लड़की से मिलने की कामना की थी। वह आश्चर्यचकित था कि उसकी इच्छा इतनी जल्दी पूर्ण हो गई। उसकी मनौती का फल उसे इतना शीघ्र मिल जाएगा, उसने ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।

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दूसरा देवदास
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अध्याय 2.07: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १२८]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 2.07 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 10. | पृष्ठ १२८

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