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प्रश्न
‘एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धरिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।’
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उत्तर
इस पंक्ति में संभव ने मनसा देवी मंदिर तथा उसके आसपास बिकने वाली वस्तुओं का चित्रण किया है। वह बताता है कि मंदिर के प्रांगण में चामुंडा के स्वरूप में मनसा देवी विराजमान थीं। यहाँ केवल पूजा-अर्चना ही नहीं होती थी, बल्कि पूजा से संबंधित वस्तुएँ भी बेची जाती थीं। उनका क्रय-विक्रय का व्यापार यहाँ भी चलता रहता था।
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