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प्रश्न
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उत्तर
भक्तों द्वारा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दीपक गंगा की धारा में प्रवाहित किए जाते हैं। इन दीपों में फूलों के साथ-साथ सिक्के भी रखकर जल में बहाए जाते हैं। स्थानीय तैराक, जिन्हें लेखिका ने ‘गंगापुत्र’ कहा है, उन दोनों से पैसे निकालकर अपनी आजीविका चलाते हैं। कभी-कभी उन्हें जोखिम का सामना भी करना पड़ता है, फिर भी वे निडर होकर यही कार्य करते रहते हैं, क्योंकि इसी से उनके परिवार का पालन-पोषण होता है। लेखिका के अनुसार ‘गंगापुत्र’ के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन का आधार है। वे दोनों में डाले गए सिक्के एकत्र करते हैं और उनकी पत्नियाँ कुशाघाट पर उन पैसों से बंधे रुपये बनाकर आजीविका अर्जित करती हैं।
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