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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए- −यों जलद-यान में विचर-विचरथा इंद्र खेलता इंद्रजाल।

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Question

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

−यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

Long Answer
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Solution

इस पंक्ति में कवि ने वर्षा ऋतु के निरंतर बदलते रूप का सुंदर चित्रण किया है। कभी गहरे काले बादलों का छा जाना, कभी मूसलाधार वर्षा का बरसना, तो कभी तालाबों से उठते धुएँ जैसे कुहासे, इन सबके कारण प्रकृति पल-पल अपना रूप बदलती रहती है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो बादलों के विमान में विराजमान देवराज इन्द्र तरह-तरह के अद्भुत और मोहक इन्द्रजाल रचकर खेल रहे हों।

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पर्वत प्रदेश में पावस
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Chapter 1.5: पर्वत प्रदेश में पावस - प्रश्न-अभ्यास (ख) [Page 28]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.5 पर्वत प्रदेश में पावस
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 2 | Page 28

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पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?


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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

है टूट पड़ा भू पर अंबर।


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बारिश, झरने, इंद्रधनुष, बादल, कोयल, पानी, पक्षी, सूरज, हरियाली, फूल, फल आदि या कोई भी प्रकृति विषयक शब्द का प्रयोग करते हुए एक कविता लिखने का प्रयास कीजिए।


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कविता में पर्वत के प्रति कवि की कल्पना अत्यंत मनोरम है-स्पष्ट कीजिए।


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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता में पर्वतों की दृष्टि किसे कहा गया है? पर्वत अपना प्रतिबिंब कहाँ और क्यों निहार रहे हैं?


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