English

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए- है टूट पड़ा भू पर अंबर।

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

है टूट पड़ा भू पर अंबर।

Short Answer
Advertisements

Solution

सुमित्रानंदन पंत जी ने इस पंक्ति में पर्वत प्रदेश की मूसलाधार वर्षा का चित्रण किया है। पावस ऋतु में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत हो जाता है। कभी-कभी वर्षा इतनी धुआँधार होती है कि प्रतीत होता है मानो पूरा आकाश ही धरती पर टूट पड़ा हो।

shaalaa.com
पर्वत प्रदेश में पावस
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.5: पर्वत प्रदेश में पावस - प्रश्न-अभ्यास (ख) [Page 28]

APPEARS IN

NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.5 पर्वत प्रदेश में पावस
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 1 | Page 28

RELATED QUESTIONS

पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?


कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है?


झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? 


निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेषअटलकुछ चिंतापर।


इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया हैस्पष्ट कीजिए।


‘पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


कविता में पर्वत को कौन-सा मानवीय कार्य करते हुए दर्शाया गया है?


पर्वतीय प्रदेश में स्थित तालाब के सौंदर्य का चित्रण कीजिए।


पर्वत से गिरने वाले झरनों की विशेषता लिखिए।


पर्वतों पर उगे पेड़ कवि को किस तरह दिख रहे हैं?


‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में तालाब की तुलना किससे की गई है और क्यों?


आपके पाठ्यक्रम में किस कविता में वर्षा के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है? अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।


‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में पर्वतों को ‘मेखलाकार पर्वत अपार’ कहने का कवि का क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25 से 30 शब्दों में लिखिए:

‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर कवि ने वृक्षों को पर्वतों की उच्चाकांक्षाएँ क्यों कहा है?


'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर बताइए कि पर्वतों की ऊँचाई से गिरने वाले झरने किसके यश का गुणगान कर रहे हैं?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर पर्वतों द्वारा अपने रूप-सौंदर्य को निहारने की कल्पना और कारण को स्पष्ट कीजिए।


“जिसके चरणों में पला ताल, दर्पण - सा फैला है विशाल" -इन पंक्तियों में कवि ने ताल को किस रूप में चित्रित किया है?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×