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Question
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।
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Solution
इन पंक्तियों में कवि ने पर्वत पर उगे ऊँचे-ऊँचे वृक्षों का मानवीकरण करते हुए उनका रूपकात्मक वर्णन किया है। पर्वत के हृदय से उठकर आकाश की ओर बढ़ते ये वृक्ष मानो ऊँचाइयों को छूने की आकांक्षा रखते हैं। वे स्थिर, निश्चल और गहन चिंतन में लीन प्रतीत होते हैं, जैसे किसी महान उद्देश्य को पाने के लिए मौन भाव से आकाश की ओर निहार रहे हों। यहाँ वृक्षों के माध्यम से ऊँचे आदर्श, दृढ़ निश्चय और अडिगता का प्रतीकात्मक चित्र प्रस्तुत किया गया है।
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