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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए- −यों जलद-यान में विचर-विचरथा इंद्र खेलता इंद्रजाल।

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प्रश्न

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

−यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

इस पंक्ति में कवि ने वर्षा ऋतु के निरंतर बदलते रूप का सुंदर चित्रण किया है। कभी गहरे काले बादलों का छा जाना, कभी मूसलाधार वर्षा का बरसना, तो कभी तालाबों से उठते धुएँ जैसे कुहासे, इन सबके कारण प्रकृति पल-पल अपना रूप बदलती रहती है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो बादलों के विमान में विराजमान देवराज इन्द्र तरह-तरह के अद्भुत और मोहक इन्द्रजाल रचकर खेल रहे हों।

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पर्वत प्रदेश में पावस
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अध्याय 1.5: पर्वत प्रदेश में पावस - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ २३]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 1.5 पर्वत प्रदेश में पावस
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 2. | पृष्ठ २३

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