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Question
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
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Solution
चाय परोसने वाले ने बहुत ही सलीके से काम किया। झुककर प्रणाम करना, बरतन पौंछना, चाय डालना सभी धीरज और सुंदरता से किए मानो कोई कलाकार बड़े ही सुर में गीत गा रहा हो।
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शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब−
(1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
(2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना', गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
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गिन्नी के सोने का अधिक उपयोग क्यों किया जाता है?
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‘व्यवहारवाद’ समाज के लिए किस प्रकार हानिकारी है?
लेखक के मित्र के अनुसार जापानी किस रोग से पीड़ित हैं और क्यों?
भारत में भी लोगों की जिंदगी की गतिशीलता में खूब वृद्धि हुई है। इसके कारण और परिणाम का उल्लेख ‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर कीजिए।
| मृगाक्षी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर के पद पर आसीन है। श्रेष्ठ संचालन व बहुमुखी प्रतिभा की धनी होने के साथ ही बुद्धिमानी से तथ्यों को सुलझाने और सभी कार्यों को व्यवस्थित करने में उसका कोई सानी नहीं। वह रात-दिन काम में जुटी रहती है। कंपनी के स्तर को बढ़ाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। कुछ दिनों से उसके सिर में दर्द रहने लगा है तथा नींद भी ठीक से नहीं आती है। ज़रा-ज़रा सी बात में चिड़चिड़ापन होता है तथा अक्सर उदासी उसे घेरे रहती है। |
इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर बताइए कि पर्णकुटी में चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या-क्या परिवर्तन महसूस किए?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60-70 शब्दों में लिखिए:
"हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।" ‘झेन की देन’ पाठ से उद्धृत लेखक का यह कथन वर्तमान परिस्थितियों में कहाँ तक सत्य है? क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
