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Question
| मृगाक्षी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर के पद पर आसीन है। श्रेष्ठ संचालन व बहुमुखी प्रतिभा की धनी होने के साथ ही बुद्धिमानी से तथ्यों को सुलझाने और सभी कार्यों को व्यवस्थित करने में उसका कोई सानी नहीं। वह रात-दिन काम में जुटी रहती है। कंपनी के स्तर को बढ़ाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। कुछ दिनों से उसके सिर में दर्द रहने लगा है तथा नींद भी ठीक से नहीं आती है। ज़रा-ज़रा सी बात में चिड़चिड़ापन होता है तथा अक्सर उदासी उसे घेरे रहती है। |
इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
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Solution
'पतझर में टूटी पत्तियाँ' पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है वह निश्चित रूप से मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है। 'झेन की देन' में मानसिक रोग होने के विभिन्न कारणों में जीवन की अधिक रफ्तार, मानसिक तनाव, उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा आदि बताए गए हैं। अधिक से अधिक काम करना व कम समय में काम निपटाना ऐसे कारणों से ही मानसिक तनाव बढ़ जाता है। यह रफ्तार दिमाग को रुग्ण कर देती है। हम अकेलेपन के शिकार हो जाते हैं और स्वयं से बातें करते हैं, लगातार बड़बड़ाते रहते हैं। मृगाक्षी के साथ भी ऐसा ही हुआ और जीवन में संतुलन न होने से वह बीमार हो गई। झेन की देन में 'टी-सेरेमनी' के माध्यम से वर्तमान का महत्व एवं सुख-चैन व आराम की ज़िंदगी के विषय में बताया गया है। भूतकाल एवं भविष्यत काल के मिथ्या होने को समझकर सहजता से जीते हुए कर्मरत रहकर, तनावरहित होकर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
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