Advertisements
Advertisements
Question
‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर बताइए कि पर्णकुटी में चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या-क्या परिवर्तन महसूस किए?
Advertisements
Solution
पर्णकुटी में चाय पीने के बाद लेखक ने अनुभव किया कि उसके दिमाग की रफ्तार धीमी हो गई है, लगभग बंद-सी हो गई है। उसे लगा वह अनंतकाल में जी रहा है, यहाँ तक कि उसे सन्नाटा भी स्पष्ट सुनाई देने लगा। चाय पीते-पीते उसके दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए तथा कुछ देर बाद जैसे दिमाग बिल्कुल बंद हो गया। केवल वर्तमान क्षण उसके सामने था और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए−
चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब−
(1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
(2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना', गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'गिरगिट' कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश 'गिन्नी का सोना' का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'आदर्शवादिता' और 'व्यवहारिकता' इनमें से जीवन में किसका महत्व है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
शुद्ध सोने का उपयोग कम किया जाता है, क्यों?
गिन्नी के सोने का अधिक उपयोग क्यों किया जाता है?
प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ किन्हें कहा गया है?
गांधी जी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे। स्पष्ट कीजिए।
लेखक के मित्र के अनुसार जापानी किस रोग से पीड़ित हैं और क्यों?
‘टी-सेरेमनी’ की चाय का लेखक पर क्या असर हुआ?
‘जीना इसी का नाम है’ लेखक ने ऐसा किस स्थिति को कहा है?
‘झेन की देन’ पाठ से आपको क्या संदेश मिलता है?
भ्रमण हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग है। अपनी व्यस्ततम दिनचर्या के बीच चैन से भरे कुछ पल शायद हम इसी प्रकार निकाल सकते हैं। शांत वातावरण मैं अपने तथा अपनों के लिए जीवन व्यतीत करना आवश्यक है।
आपके दवारा इस पाठ्यक्रम में पढ़े गए पाठ में चैन भरे पल बिताने के लिए लेखक ने क्या किया? क्या वास्तव में सभी को इसकी आवश्यकता है? अपने विचार व्यक्त कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60-70 शब्दों में लिखिए:
"हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।" ‘झेन की देन’ पाठ से उद्धृत लेखक का यह कथन वर्तमान परिस्थितियों में कहाँ तक सत्य है? क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
