Advertisements
Advertisements
Question
समाज के उत्थान में आदर्शवादियों का योगदान स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
Solution
हर समाज के कुछ शाश्वत मूल्य होते हैं। इनमें सत्य, त्याग, प्रेम, सहभागिता परोपकार आदि प्रमुख हैं। आदर्शवादी लोग ही अपने व्यवहार द्वारा इन मूल्यों को बनाए रखते हैं और आने वाली पीढ़ी को हस्तांतरित कर जाते हैं जिससे समाज में ये मूल्य बने रहते हैं।
RELATED QUESTIONS
जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए−
शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए−
'टी-सेरेमनी' में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रांसगिकता स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना', गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?
गिन्नी के सोने का अधिक उपयोग क्यों किया जाता है?
प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ किन्हें कहा गया है?
गांधी जी प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट थे। स्पष्ट कीजिए।
‘व्यवहारवाद’ समाज के लिए किस प्रकार हानिकारी है?
लेखक के मित्र के अनुसार जापानी किस रोग से पीड़ित हैं और क्यों?
‘जीना इसी का नाम है’ लेखक ने ऐसा किस स्थिति को कहा है?
| मृगाक्षी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर के पद पर आसीन है। श्रेष्ठ संचालन व बहुमुखी प्रतिभा की धनी होने के साथ ही बुद्धिमानी से तथ्यों को सुलझाने और सभी कार्यों को व्यवस्थित करने में उसका कोई सानी नहीं। वह रात-दिन काम में जुटी रहती है। कंपनी के स्तर को बढ़ाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। कुछ दिनों से उसके सिर में दर्द रहने लगा है तथा नींद भी ठीक से नहीं आती है। ज़रा-ज़रा सी बात में चिड़चिड़ापन होता है तथा अक्सर उदासी उसे घेरे रहती है। |
इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60-70 शब्दों में लिखिए:
"हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है वही सत्य है। उसी में जीना चाहिए।" ‘झेन की देन’ पाठ से उद्धृत लेखक का यह कथन वर्तमान परिस्थितियों में कहाँ तक सत्य है? क्या आप इससे सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
