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मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

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Question

मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

Activity
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Solution

कबीर के दोहे

  1. मीठी वाणी/बोली संबंधी दोहा
    ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोइ।
    अपना तन सीतल करै, औरन को सुख होइ॥
    भावार्थ: हमें अहंकार छोड़कर मधुर और विनम्र वाणी बोलनी चाहिए। मीठी वाणी बोलने से स्वयं को शांति मिलती है और दूसरों को भी सुख प्राप्त होता है।
  2. ईश्वर-प्रेम संबंधी दोहे
    कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
    ऐसे घटि-घटि राम हैं, दुनिया देखै नाँहिं॥
    भावार्थ: जिस प्रकार हिरण की नाभि में कस तूरी होती है, फिर भी वह उसे वन में खोजता है, उसी प्रकार ईश्वर प्रत्येक प्राणी के हृदय में विद्यमान हैं, परंतु मनुष्य उन्हें बाहर खोजता रहता है।
    जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहिं।
    सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माँहि॥
    भावार्थ: जब तक मनुष्य में अहंकार रहता है, तब तक उसे ईश्वर का अनुभव नहीं होता। अहंकार मिटते ही ईश्वर का ज्ञानरूपी प्रकाश प्राप्त हो जाता है।
    बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
    राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ॥
    भावार्थ: ईश्वर-वियोग का दुख साँप के विष के समान होता है। राम से छुड़ा भक्त न तो सुखपूर्वक जीवित रह सकता है और यदि जीवित रहता है, तो विरह में व्याकुल रहता है।
    चार्ट के लिए शीर्षक:
    “कबीर के दोहों में मधुर वाणी और ईश्वर-प्रेम”

संदेश: मधुर वाणी बोलें, अहंकार त्यागें और ईश्वर को अपने अंतर्मन में खोजें।

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साखी
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Chapter 1.1: साखी - परियोजना कार्य [Page 6]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.1 साखी
परियोजना कार्य | Q 1. | Page 6

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ 'सोना' और 'जागना' किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई' −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।


पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।


‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है तथा व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।


कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।


ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?


मन में आपा कैसे उत्पन्न होता है? आपा खोने के लिए कबीर क्यों कह रहे हैं?


‘ऐसैं घटि घटि राँम है’ के माध्यम से कबीर ने मनुष्य को किस सत्यता से परिचित किया है?


हर प्राणी में राम के बसने की तुलना किससे की गई है?


कबीर की दृष्टि में संसार सुखी और वह स्वयं दुखी हैं, ऐसा क्यों?


कबीर की साखियाँ जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनमें जिन जीवन-मूल्यों की झलक मिलती है, उनका उल्लेख कीजिए।


ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।


'कर चले हम फ़िदा' कविता और 'कारतूस' एकांकी के भावों की तुलना कीजिए। विश्लेषण करते हुए अपने मत के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।।
  1. कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
    (a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
    (b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
    (c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
    (d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
  2. 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
    (a) निद्रा और अनिद्रा के
    (b) अंधकार और प्रकाश के
    (c) अज्ञान और ज्ञान के
    (d) दुःख और सुख के 
  3. किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
    (a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
    (b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
    (c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
    (d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
  4. कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
    (a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
    (b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
    (c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
    (d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है।
  5. 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
    (a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
    (b) विष का प्रभाव कम न होना
    (c) मंत्र सिद्ध न होना
    (d) कोई उपाय काम न आना

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