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मन में आपा कैसे उत्पन्न होता है? आपा खोने के लिए कबीर क्यों कह रहे हैं?

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Question

मन में आपा कैसे उत्पन्न होता है? आपा खोने के लिए कबीर क्यों कह रहे हैं?

Short/Brief Note
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Solution

मनुष्य की इच्छा होती है कि वह सांसारिक सुखों का अधिकाधिक उपयोग करे। इन सुखों की चाहत में वह सुख के नाना प्रकार के साधन एकत्र कर लेना चाहता है। इसके अलावा वह धन और बल का स्वामी भी बनना चाहता है। ऐसे होते ही उसके मन में आपा उत्पन्न हो जाता है। आपा खोने के लिए कबीर इसलिए कह रहे हैं कि इससे मनुष्य-मनुष्य में दूरी बढ़ती है तथा मनुष्य गर्वोक्ति का शिकार हो जाता है।

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साखी
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मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?


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ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?


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संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ 'सोना' और 'जागना' किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।


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'ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई' −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?


भाव स्पष्ट कीजिए −

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।


भाव स्पष्ट कीजिए−
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।


‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है तथा व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।


कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।


कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।


निंदक के बारे में कबीर की राय समाज से पूरी तरह भिन्न थी। स्पष्ट कीजिए।


ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।


कबीर और मीरा की भक्ति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।।
  1. कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
    (a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
    (b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
    (c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
    (d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
  2. 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
    (a) निद्रा और अनिद्रा के
    (b) अंधकार और प्रकाश के
    (c) अज्ञान और ज्ञान के
    (d) दुःख और सुख के 
  3. किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
    (a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
    (b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
    (c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
    (d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
  4. कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
    (a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
    (b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
    (c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
    (d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है।
  5. 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
    (a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
    (b) विष का प्रभाव कम न होना
    (c) मंत्र सिद्ध न होना
    (d) कोई उपाय काम न आना

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