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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?

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Question

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?

Short/Brief Note
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Solution

ईश्वर सब ओर व्याप्त है। वह निराकार है। हमारा मन अज्ञानता, अहंकार, विलासिताओं में डूबा है। इसलिए हम उसे नहीं देख पाते हैं। हम उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सब जगह ढूँढने की कोशिश करते हैं लेकिन जब हमारी अज्ञानता समाप्त होती है हम अंतरात्मा का दीपक जलाते हैं तो अपने ही अंदर समाया ईश्वर हम देख पाते हैं।

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साखी
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Chapter 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास [Page 6]

APPEARS IN

NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास | Q (क) 3. | Page 6

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?


भाव स्पष्ट कीजिए−
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।


पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।


‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है तथा व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।


कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।


कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।


ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?


सब अँधियारा मिटि गया’ यहाँ किस अँधियारे की ओर संकेत किया गया है? यह अँधियारा कैसे दूर हुआ?


कबीर की दृष्टि में संसार सुखी और वह स्वयं दुखी हैं, ऐसा क्यों?


कबीर की साखियाँ जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनमें जिन जीवन-मूल्यों की झलक मिलती है, उनका उल्लेख कीजिए।


ईश्वर के संबंध में कबीर के अनुभवों और मान्यताओं का वर्णन साखियों के आधार पर कीजिए।


निंदक किसे कहा गया है? वह व्यक्ति के स्वभाव का परिष्करण किस तरह करता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

कबीर ने निंदक को पास रखने की सलाह क्यों दी है? क्या यह सलाह आपको उचित प्रतीत होती है? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।


कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?

  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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