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भाव स्पष्ट कीजिए − बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

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Question

भाव स्पष्ट कीजिए

बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

Short Answer
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Solution

इस कविता का भाव है कि जिस व्यक्ति के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम रुपी विरह का सर्प बस जाता है, उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता है। अर्थात भगवान के विरह में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है। उस पर किसी बात का कोई असर नहीं होता है।

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साखी
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Chapter 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास (ख) [Page 6]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 1 | Page 6

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