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भाव स्पष्ट कीजिए − बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

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Question

भाव स्पष्ट कीजिए −

बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

Short Answer
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Solution

इस कविता का भाव है कि जिस व्यक्ति के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम रुपी विरह का सर्प बस जाता है, उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता है। अर्थात भगवान के विरह में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है। उस पर किसी बात का कोई असर नहीं होता है।

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साखी
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Chapter 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास [Page 6]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 1. | Page 6

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ 'सोना' और 'जागना' किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
'ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई' −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।


भाव स्पष्ट कीजिए −

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।


भाव स्पष्ट कीजिए−
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।


पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।


कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।


ऐसी बाँणी बोलिये’ के माध्यम से कबीर कैसी वाणी बोलने की सीख दे रहे हैं और क्यों?


मन में आपा कैसे उत्पन्न होता है? आपा खोने के लिए कबीर क्यों कह रहे हैं?


कबीर की दृष्टि में संसार सुखी और वह स्वयं दुखी हैं, ऐसा क्यों?


राम वियोगी की दशा कैसी हो जाती है? स्पष्ट कीजिए।


निंदक के बारे में कबीर की राय समाज से पूरी तरह भिन्न थी। स्पष्ट कीजिए।


निंदक किसे कहा गया है? वह व्यक्ति के स्वभाव का परिष्करण किस तरह करता है?


'कर चले हम फ़िदा' कविता और 'कारतूस' एकांकी के भावों की तुलना कीजिए। विश्लेषण करते हुए अपने मत के समर्थन में तर्क प्रस्तुत कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्‍प चुनकर लिखिए:

सुखिया सब संसार है, खायै अरू सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै।।
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बोरा होइ।।
  1. कबीरदास जी क्यों दुःखी हैं?
    (a) ईश्वर से बिछुड़ने के कारण।
    (b) ईश्वर को प्राप्त न कर सकने के कारण।
    (c) विषय-वासनाओं में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
    (d) ईश्वर भजन में लिप्त मनुष्यों को देखकर।
  2. 'सोना' और 'जागना' क्रमशः किसके प्रतीकार्थ हैं?
    (a) निद्रा और अनिद्रा के
    (b) अंधकार और प्रकाश के
    (c) अज्ञान और ज्ञान के
    (d) दुःख और सुख के 
  3. किस व्यक्ति पर 'मंत्र' का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता?
    (a) जिसका मन सांसारिक विषय-वासनाओं में लिप्त हो।
    (b) जिसका मन अहंकार की भावना से भरा हो।
    (c) जिसके मन में विरह रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
    (d) जिसके मन में मिलन रूपी सर्प ने घर बसा लिया हो।
  4. कबीरदास जी के अनुसार 'बौरा' कौन है?
    (a) जिसे प्रभु का साक्षात्कार हो गया है।
    (b) जो प्रभु से विलग रहना चाहता है।
    (c) जो प्रभु की दिन-रात सेवा कर रहा है।
    (d) जो प्रभु के वियोग में जीवन व्यतीत कर रहा है।
  5. 'मंत्र न लगना' का अर्थ हैः
    (a) पीड़ित व्यक्ति का स्वस्थ न होना
    (b) विष का प्रभाव कम न होना
    (c) मंत्र सिद्ध न होना
    (d) कोई उपाय काम न आना

कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?

  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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