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Question
भाव स्पष्ट कीजिए −
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
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Solution
इस कविता का भाव है कि जिस व्यक्ति के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम रुपी विरह का सर्प बस जाता है, उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता है। अर्थात भगवान के विरह में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है। उस पर किसी बात का कोई असर नहीं होता है।
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भाव स्पष्ट कीजिए−
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भाव स्पष्ट कीजिए−
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पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै - जीना
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