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Question
भाव स्पष्ट कीजिए−
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।
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Solution
इस पंक्ति द्वारा कवि का कहना है कि जब तक मनुष्य में अज्ञान रुपी अंधकार छाया है वह ईश्वर को नहीं पा सकता। अर्थात अहंकार और ईश्वर का साथ-साथ रहना नामुमकिन है। यह भावना दूर होते ही वह ईश्वर को पा लेता है।
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