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भाव स्पष्ट कीजिए−जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।

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Question

भाव स्पष्ट कीजिए−
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।

Short/Brief Note
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Solution

इस पंक्ति द्वारा कवि का कहना है कि जब तक मनुष्य में अज्ञान रुपी अंधकार छाया है वह ईश्वर को नहीं पा सकता। अर्थात अहंकार और ईश्वर का साथ-साथ रहना नामुमकिन है। यह भावना दूर होते ही वह ईश्वर को पा लेता है।

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साखी
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Chapter 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास [Page 6]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 3. | Page 6

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भाव स्पष्ट कीजिए −

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भाव स्पष्ट कीजिए −

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कबीर के अनुसार मीठी बोली का क्या प्रभाव होता है?

  1. हमारा शरीर शीतल होता है।
  2. बोली में अहं का भाव आता है।
  3. हमारा काम सरलतापूर्वक हो जाता है।
  4. सुनने वाले को सुखानुभूति होती है।

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