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भाव स्पष्ट कीजिए−जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।

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प्रश्न

भाव स्पष्ट कीजिए
जब मैं था तब हरि नहींअब हरि हैं मैं नाँहि।

टीपा लिहा
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उत्तर

इस पंक्ति द्वारा कवि का कहना है कि जब तक मनुष्य में अज्ञान रुपी अंधकार छाया है वह ईश्वर को नहीं पा सकता। अर्थात अहंकार और ईश्वर का साथ-साथ रहना नामुमकिन है। यह भावना दूर होते ही वह ईश्वर को पा लेता है।

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साखी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.1: साखी - प्रश्न-अभ्यास (ख) [पृष्ठ ६]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 1.1 साखी
प्रश्न-अभ्यास (ख) | Q 3 | पृष्ठ ६

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भाव स्पष्ट कीजिए

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