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प्रश्न
रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
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उत्तर
- पहले पद का केंद्रीय भाव: जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती। कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है। भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है।
- दूसरे पद का केंद्रीय भाव: प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं। वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं। ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।
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उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
शुकी बैठ अंडे है सेती
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
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1. सुखिया के बाहर जाने पर पिता का हृ्दय काँप उठता था।
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2. पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।
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3. पुजारी से प्रसाद/फूल पाने पर सुखिया के पिता की मनःस्थिति।
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4. पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।
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निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए −
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