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रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

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प्रश्न

रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

  • पहले पद का केंद्रीय भाव: जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती। कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है। भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है।
  • दूसरे पद का केंद्रीय भाव: प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं। वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं। ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।
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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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पाठ 7: रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु … - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ७५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 Class 9
पाठ 7 रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु …
प्रश्न अभ्यास | Q 3 | पृष्ठ ७५

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