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प्रश्न
।। कथनी मीठी खाँड़-सी ।।
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उत्तर
कथनी हमेशा मधुर और कर्णप्रिय होनी चाहिए, जैसे मीठा खाँड़। मीठी वाणी सुननेवाले को सुख और संतोष देती है, जबकि कटुता समस्याएँ उत्पन्न करती है। मधुर वाणी समाज में जोड़ने का कार्य करती है और आपसी दरारें मिटाकर मित्रता बढ़ाती है। विनम्रता और प्रेम से युक्त वाणी सफलता, यश और समृद्धि प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है।
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‘कर्म ही पूजा है’, विषय पर अपने विचार सौ शब्दों में लिखो।
यदि प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो जाएँ तो...... जैसे - जल, वन आदि।
।। जीवन चलता ही रहता।।
।। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ।।
चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

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पसंदीदा विषय पर विज्ञापन बनाकर उसको पढ़ो।
किसी एक संस्मरणीय घटना का वर्णन करो।
अंधश्रद्धा के कारण और उसे दूर करने के उपाय ढूँढ़ो और किसी एक प्रसंग को प्रस्तुत करो।
अपने साथ घटित कोई मजेदार घटना बताओ।
मार्ग पर चलते हुए तुमने कुछ यातायात संकेत देखे होंगे। इन सांकेतिक चिह्न का क्या अर्थ है, लिखो:

आपने समाचारपत्रों, टी.वी. आदि पर अनेक प्रकार के विज्ञापन देखे होंगे जिनमें ग्राहकों को हर तरीके से लुभाने का प्रयास किया जाता है, नीचे लिखे बिंदुओं के संदर्भ में किसी एक विज्ञापन की समीक्षा कीजिए और यह लिखिए कि आपको विज्ञापन की किस बात से सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया।
- विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु
- विज्ञापन में आए पात्र व उनका औचित्य
- विज्ञापन की भाषा
दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-
उच्च शिक्षा हेतु छात्रों का विदेशों को पलायन
निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
आप आस्था/मनु हैं। 'ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य' इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में अपने विचार लिखकर किसी दैनिक समाचार- पत्र के संपादक को भेजिए।
