मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ८ वी

मैंने समझा पूर्ण विश्राम पाठ से

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प्रश्न

मैंने समझा पूर्ण विश्राम पाठ से 

अति संक्षिप्त उत्तर
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उत्तर

व्यक्ति को अपने व्यस्त जीवन में विश्राम करने का बिल्कुल मौका नहीं मिलता। यदि मौका मिल भी जाए तो वह घरेलू कारणों से उसका लाभ नहीं उठा पाता। अत: हमें सैर पर जाने से पहले आवश्यक चीजों की सूची बनानी चाहिए और पूर्ण व्यवस्था के साथ सैर पर जाना चाहिए। इससे हम बिना चिंता के विश्राम तथा सैर का आनंद उठा सकते हैं।

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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.8: पूर्ण विश्राम - उपयोजित लेखन [पृष्ठ २२]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
पाठ 1.8 पूर्ण विश्राम
उपयोजित लेखन | Q 2 | पृष्ठ २२

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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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