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नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :जाकी जोति बरै दिन राती

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प्रश्न

नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
जाकी जोति बरै दिन राती

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

ईश्वर दीपक के समान है जिसकी ज्योति हमेशा जलती रहती है। उसका प्रकाश सर्वत्र सभी समय रहता है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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अध्याय 7: रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु … - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ७५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 [English] Class 9
अध्याय 7 रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु …
प्रश्न अभ्यास | Q 2.3 | पृष्ठ ७५

संबंधित प्रश्न

सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।

शुकी बैठ अंडे है सेती


तोते और शुकी के गीत का अंतर पठित कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


सुखिया के पिता पर कौन-सा आरोप लगाकर उसे दंडित किया गया?


निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए 

पापी ने मंदिर में घुसकर
किया अनर्थ बड़ा भारी


पिता सुखिया को कहाँ जाने से रोकता था और क्यों?


‘गीत-अगीत’ कविता का कथ्य स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ


निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वो भी आदमी


‘आदमी नामा’ कविता का मूल कथ्य/प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।


‘सुनके दौड़ता है सो है वो भी आदमी’ के माध्यम से नज्मकार ने क्या कहना चाहा है?


मसज़िद का उल्लेख करके नज्मकार ने किस पर व्यंग्य किया है? इसका उद्देश्य क्या है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
हमें अपना दुख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?


कुछ मनुष्य पशुओं से भी हीन होते हैं। पठित दोहे के आधार पर हिरन के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।


रैदास को किसके नाम की रट लगी है? वह उस आदत को क्यों नहीं छोड़ पा रहे हैं?


जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?


कवि रैदास ने किन-किन संतों का उल्लेख अपने काव्य में किया है और क्यों?


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