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Arts (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] - CBSE Question Bank Solutions for Hindi (Elective)

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Hindi (Elective)
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कवि 'नयन न तिरपित भेल' के माध्यम से विरहिणी नायिका की किस मनोदशा को व्यक्त करना चाहता है?

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
Chapter: [1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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'सेह फिरत अनुराग बखानिअ तिल-तिल नूतन होए' से लेखक का क्या आशय है?

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
Chapter: [1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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नायिका के प्राण तृप्त न हो पाने के कारण अपने शब्दों में लिखिए।

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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कोयल और भौरों के कलरव का नायिका पर क्या प्रभाव पड़ता है?

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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कातर दृष्टि से चारों तरफ़ प्रियतम को ढूँढ़ने की मनोदशा को कवि ने किन शब्दों में व्यक्त किया है?

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
Chapter: [1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
जनम अवधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल।।

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल।।
[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि, मूदि रहए दु नयान।
कोकिल-कलरव, मधुकर-धुनि सुनि, कर देइ झाँपइ कान।।

[1.07] तुलसीदास : (क) भरत-राम का प्रेम, (ख) पद
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प्रथम सवैये के आधार पर बताइए कि प्राण पहले कैसे पल रहे थे और अब क्यों दुखी हैं?

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
सो घनआनंद जान अजान लौं टूक कियौ पर वाँचि न देख्यौ।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-

तब हार पहार से लागत हे, अब बीच में आन पहार परे।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, ______ बिललात महा दुःख दोष भरे।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
ऐसो हियो हित पत्र पवित्र ______ टूक कियौ पर बाँचि न देख्यौ।

[1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
Chapter: [1.11] घनानंद : कवित्त / सवैया
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लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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लेखक का हिंदी-साहित्य के प्रति झुकाव किस प्रकार बढ़ता गया?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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'निस्संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का ज़िक्र किया है?

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है। ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

[2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Chapter: [2.01] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
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