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Question
सुवचन पर आधारित कहानी लेखन कीजिए।
श्रम ही देवता है।
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Solution
श्रम ही देवता है
राजू के पिताजी एक साधू मेहनती किसान थे, जो दिन रात मेहनत करते थे ताकि उनके बच्चे भविष्य में बेहतर जीवन जी सकें। राजू ने अपने पिताजी को देखकर सीखा कि श्रम का महत्व ही कुछ और है। एक दिन, राजू के गाँव में एक उत्सव हुआ। उस दिन उसे गाँव के सर्वांगीण उन्नति के लिए समर्पित लोगों की एक सभा में बुलाया गया। वहां एक विदेशी महाशय ने एक सुवचन दिया, "श्रम ही देवता है।" राजू ने कहा, "हमारे पुराने शास्त्रों में कहा गया है कि 'श्रम ही देवता है।' हमें अपने काम में समर्पित रहना चाहिए और मेहनत करके ही हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।" और उन्हें यह सिखाई कि श्रम में समर्पण है, और यह समर्पण ही उन्हें सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
राजू ने गाँव के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के लिए एक स्कूल की स्थापना की और उन्हें नौकरी मिलने के लिए कौशल विकसित करने में मदद की। धीरे-धीरे, राजू की इस कोशिश ने गाँव को सुधारने में मदद की और वह देखने को मिला कि कैसे श्रम से ही उन्नति और समृद्धि आ सकती है।
गाँववाले ने भी उसकी सोच को स्वीकारा और उसका साथ दिया। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि रमेश ने यह सिद्ध किया कि अगर हमारी मेहनत में समर्पण है, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं और अपनी पहचान बना सकते हैं।
सिख: श्रम में समर्पण होना एक व्यक्ति को सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
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