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Question
पद्यांश॑ निर्दिष्टा: कृती: कुरुत। (5 त: 4)
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वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराजसहोदर । मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान् बहून् । यादृशं वपते बीजं क्षेत्रमासाद्य कर्षकः। विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। |
(क) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
यमः किं हरति?
(ख) विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत।
| विशेषणम् | विशेष्यम् | |
| (1) | दक्षाः | विषयान् |
| (2) | बहून् | वाचनम् |
| मनुजाः |
(ग) जालरेखाचित्रं पूरयत।
| विद्या | प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। |
| गुरूणां ______। | |
| परं दैवतम्। | |
| नरस्य अधिकं ______। |
(घ) पद्यांशात् 2 द्वितीयाविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत।
(च) पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत।
- वाचनेनैव =______ + एव।
- क्षेत्रमासाद्य = क्षेत्रम् +______।
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Solution
(क) यमः प्राणान् हरति।
(ख)
| विशेषणम् | विशेष्यम् | |
| (1) | दक्षाः | मनुजाः |
| (2) | बहून् | विषयान् |
(ग)
| विद्या | प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। |
| गुरूणां गुरुः। | |
| परं दैवतम्। | |
| नरस्य अधिकं रूपम्। |
(घ) द्वितीया विभक्त्यन्तपदे -
- प्राणान्
- धनानि
- विषयान्
- बीजं
- क्षेत्र
- फलम्
(च)
- वाचनेनैव = वाचनेन + एव।
- क्षेत्रमासाद्य = क्षेत्रम् + आसाद्य।
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